
why dengue vaccine is not effective in India
इंसानों के लिए जानलेवा बना डेंगू का वैक्सीन भारत में नहीं आया है। हालांकि यह वैक्सीन मैक्सिको में दिसंबर 2015 में ही तैयार हो गया था। इस टीके को एक साल में तीन बार लगाया जाता है। इसमें पहले टीके के बाद दूसरा छह माह और तीसरा 12 माह में लगता है। डेंगवैक्सिया नामक वैक्सीन तैयार करने वाली कंपनी का दावा है कि यह वैक्सीन 9 से 45 साल की आयु तक डेंगू वायरस के खतरे से बचाता है। डेंगू वायरस की स्ट्रेन बदलने की प्रवृत्ति के कारण इसे भारत में लागू नहीं किया जा रहा है।
दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि डेंगू का भी स्ट्रेन बदलने के कारण इसे फिलहाल भारत में लाया जाना उचित नहीं समझा जा रहा है। मानव को वैक्सीन लगाने के बाद शरीर की ओर से बनाई गई एंटीबॉडी वायरस के स्ट्रेन बदलने के कारण अप्रभावी हो जाती है। हालांकि वहीं स्वाइन फ्लू का वायरस केवल मानव शरीर में जीवित रहता है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह भी स्ट्रेन बदलता है। इसके बावजूद स्वाइन फ्लू वैक्सीन काफी हद तक कारगर रहता है।
स्ट्रेन बदलने के कारण कारगर नहीं वैक्सीन
डेंगू के वायरस बहुत जल्दी अपना स्ट्रेन बदलते है। मानव जो कार्य एक शताब्दी में करता है, वही कार्य वायरस एक दिन में कर लेते हैं। इसकी नई जनरेशन जल्दी-जल्दी सामने आती है। इसी कारण से वैक्सीन ज्यादा प्रचलन में नहीं आया है। डेंगू वायरस ने कितने स्ट्रेन बदले हैं। इस पर रिसर्च चल रहा है। इसके साइड इफैक्ट भी पाए गए हैं। वैक्सीन 20 से 30 फीसदी तक गंभीर बीमारियों को रोकता है। दूसरे देशों में परीक्षण के तौर पर चल रहा है। भारत में भी बनने के प्रयास चल रहे हैं। - डॉ. आलोक गुप्ता, वरिष्ठ आचार्य, मेडिसिन विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
डेंगू से किशोरी की मौत
मथुरादास माथुर अस्पताल में भर्ती चौपासनी हाउसिंग बोर्ड 17ई सेक्टर के पास हरिओम नगर पुरुषोत्तम मार्ग निवासी डेंगू पीडि़त 17 वर्षीय किशोरी की बुधवार को मौत हो गई। इस बालिका का पूर्व में एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। उसके बाद एमडीएम अस्पताल मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया। जोधपुर में अभी तक डेंगू से तीसरी मौत हुई है। अब तक डेढ़ सौ से अधिक रोगी डेंगू पॉजीटिव आ चुके हैं। निजी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. जेसी मालू ने बताया कि यह किशोरी उनके अस्पताल में भर्ती थी, जिसे बाद में एमडीएम अस्पताल भेजा गया। उसे डेंगू पॉजिटिव था। डेंगू से उसकी प्लेट्लेट्स गिर गई। लीवर में इंफेक्शन आदि हो गए थे। अस्पताल में तीन-चार दिन भर्ती रही, उसके बाद परिजन एमडीएम ले गए।
उधर, एमडीएम अस्पताल के डॉ. अरविंद जैन ने बताया कि मरीज बाहर से डेंगू पॉजिटिव आया था। जब तक डेंगू एलिजा टेस्ट से तय नहीं होता, तब तक सरकार नहीं मानती। बाहर के अस्पतालों में कार्ड टेस्ट होता है। मरीज कार्ड टेस्ट से पॉजीटिव थी। यहां किशोरी की मौत का प्रमुख कारण सेप्टिसीमिया रहा। अस्पताल से पुष्टि नहीं हो पाई है कि उसकी एलाइजा टेस्ट के लिए सैंपल भेजा गया या नहीं। शहर में गुरुवार को डेंगू के 4 मरीज पॉजीटिव मिले, जबकि इस दिन 19 सैंपल लगे थे। चिकनगुनिया के 40 सैंपल लगे, जिसमें 11 मरीज पॉजीटिव मिले। इस दिन एच-1एन-1 की रिपोर्ट शून्य आई, इसके लिए दो सैंपल लगे थे।
Published on:
03 Nov 2017 10:17 am
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