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कोर्ट के आदेश के खिलाफ दलितों का हल्लाबोल, SC-ST एक्ट में दखल तो सत्ता से बेदखल हो जाएगा कमल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में जगह-जहग हो रहे प्रदर्शन, कई संगठनों ने भाजपा पर लगाए आरोप

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में जगह-जहग हो रहे प्रदर्शन, कई संगठनों ने भाजपा पर लगाए आरोप

कानपुर। एससी.-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में कानपुर के दर्जनों दलित संगठन और स्टूडेंट्स सड़क पर उतर आए और जमकर प्रदर्शन किया। गुरूदेव टॉकीज के पास से लोगों ने जुलूस रैली निकाली और पीएम मोदी को इस पर हस्ताक्षेप की मांग की। दलित पैंथर पार्टी के अध्यक्ष धनीराम बौद्ध ने कहा कि केंद्र सरकार के इशारे पर दलित समाज का उत्पीड़न हो रहा है और अब कानून में बदलाव के जरिए हमें सुकून से जीने नहीं दिया जाएगा। भाजपा और पीएम मोदी से मांग करते हैं कि कोर्ट में जाकर दलित समाज की पैरवी करें और कानून को बदले जाने से रोकें।
गुरूदेव के पास से निकाला जुलूस
एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलाव के खिलाफ देशभर में दलित संगठनों ने बंद का ऐलान किया है। जिसका व्यापक असर कानुपर के कई इलाकों में दिखा। सैकड़ों की संख्या में दलित संगठन सड़क पर उतर आए और धरना-प्रदर्शन करनें गले। गुरूदेव से दलितों ने जुलूस रैली निकाल कर ऐलान किया कि यदि एससी-एसटी एक्ट में कोई बदलाव किया तो हम सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे। पैथर पार्टी के अध्यक्ष धनीरम बौद्ध ने कहा कि भाजपा और संघ दलितों का उत्पीड़न कर रहे हैं। संघ आरक्षण के खिलाफ है तो अब कोर्ट ने हमसे हमारा कानूनी हक छीन रहा है। हम देश के प्रघानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द कोर्ट में अपना वकील खड़ा करें और एससी एसटी एक्ट को बचाएं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो 2019 में भाजपा को दलित चुनाव हरा देगा।
इसके चलते सड़क पर उतरे लोग
सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को महाराष्ट्र के एक मामले को लेकर एससी एसटी एक्ट में नई गाइडलाइन जारी की थी। नई गाइडलाइन के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है।’ अब अगर शिकायत मिलती है तो तुंरत मुकद्दमा दर्ज नहीं होगा। ’ शिकायत की जांच डीएसपी लेवल के पुलिस अफसर द्वारा की जाएगी और यह जांच समयबद्ध होगी। सरकारी कर्मचारी अधिनियम का दुरूपयोग करता है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए विभागीय अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। अब अगर एससी/एसटी एक्ट के तहत जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने के आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए, तो उस वक्त उन्हें आरोपी की हिरासत बढ़ाने का फैसला लेने से पहले गिरफ्तारी की वजहों की समीक्षा करनी चाहिए और जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं है, उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से हो सकेगी।

कुछ तरह से किया प्रोटेस्ट
शिक्षक पार्क में प्रदर्शन कर रहे दलित समाज के ईशु सोनकर ने बताया की जिस तरह से इस भाजपा की केन्द्र व प्रदेश सरकार में दलितों के अधिकारों का हनन हो रहा है वह पूरी तरह से गलत है। उसको लेकर जहा पूरे देश में दलित समाज के लोगों ने भारत बंद का आवाहन किया है। वहीँ देश का दलित इस तरह आये दिन हो रहे मामलां से क्षुब्ध है । प्रदर्शन के दौरान मौजूद दलित समाज के महेंद्र कुमार ने कहा की जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट को निष्प्रभावी बनाने के आदेश दिए है उसमें केंद्र सरकार द्वारा कोई पक्ष न रखे जाने और बाबा साहेब के नाम में राजनीतिक छेड़छाड़ करने पर आमादा है। दलितों का उत्पीड़न जमकर कर रही है आज पीएम् नरेंद्र मोदी जी के गुरु और उनके प्रेरणा श्रोत गधो के समक्ष उनको सद्बुद्धि प्रदान करने का प्रदर्शन किया गया है।
जाम पर बैठे सैकड़ों लोग
कानपुर से कन्नौज हाईवे को लोगों ने जाम कर दिया। जिसकी सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंचे और उन्हें समझाया, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थी। एसपी ग्रोवर के समझाने पर लोगों ने जाम खोल दिया और पैदल जुलूस निकाला। पुलिस-प्रशासन ने हिंसा को देखते हुए पीएसी और अर्धसैनिक बल के जवानों को कई इलाकों में तैनात कर दिया है। एडीजी, डीएम, एडीएम सिटी सहित तमाम अलाधिकारी पल-पल की जानकारी ले रहे है। कई नेताओं को घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है। वहीं राजकुमार पासवान ने कहा कि मोदी सरकार नहीं चाहती कि दलित विकास करें और आगे बढ़ें। पहले आरक्षण खम्त करने का षणयंत्र रचा गया और अब एससी एसटी एक्ट कानून में बदलाव कर हमारे एक अस्त्र को छीना जा रहा है।
भाजपा ने कहा दलितों के साथ मोदी सरकार
भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेद्र मैथानी ने कहा कि केद्र सरकार ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करने में देर नहीं हुई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पढ़ने और समझने में समय लगता है. जिसके बाद ही ऐसा कदम उठाया जाता है। मैथानी ने सपा, बसपा और कांग्रेस के नेताओं का ऐसे मामलों में सियासत नहीं करने की नसीहत दी है। मैथानी ने कहा कि लंबे समय तक देश में कांग्रेस का ही राज रहा है. । अगर आज दलितों की हालत दयनीय है तो इसके लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है, इसलिए कांग्रेसियों को इस बारे में बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। कांग्रेस बताए बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न 1990 में जाकर क्यों मिला। जब मिला तब वीपी सिंह सरकार को बीजेपी का समर्थन था।