
कानपुर. विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कानपुर के रूमा स्थित संगठन से जुड़े पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें 21 साल के प्रशांत शुक्ला भी शामिल हुए। अमित शाह ने इस दौरान 18 हजार वार्ड प्रमुख से फेस-टू-फेस बात की थी, तभी कम उम्र के कार्यकर्ता प्रशान्त से उनकी मुलाकात हुई। पहली बार में कानपुर के छोरे ने अमित शाह के दिल में जगह बना ली और इसी के बाद उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का मंडल अध्यक्ष बनाया गया। प्रशान्त ने पार्षद पद के जरिए राजनीति पारी की शुरूआत करने की इच्छा कैबिनेट मंत्री सतीश महाना से की। मंत्री ने आनन-फानन में उनका नाम दावेदारों की सूची में दर्ज करवाया और टिकट दिलवाया। मतगणना के बाद प्रशान्त ने वार्ड संख्या 95 यशोदा नगर से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर चुनाव जीत लिया। प्रशन्त 110 में से सबसे कम 22 साल 11 माह की उम्र के पार्षद हैं।
सात साल से भाजपा के लिए कर रहे काम
नगर निकाय में कम उम्र के पार्षद चुने जाने के बाद प्रशान्त काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि जब हमारी उम्र महज पंद्रह साल की थी, तब से हम भाजपा के लिए काम करते थे। सात साल तक भाजपा के लिए जमीन पर काम किया। महाराजपुर विधानसभा चुनाव के वक्त हमने करीब एक लाख लोगों से मिले और पार्टी की विचारधारा से उन्हें अवगत कराया। सभी मतदाताओं के नाम, पता और मोबाइन नंबर लिखे। मतदान के वक्त हमने महाराजपुर से चुनाव लड़ रहे मंत्री सतीश महाना को बता दिया था कि जिले में आपकी सबसे ज्यादा वोटों से जीत होगी और नतीजा भी हमारे पक्ष में आया। प्रशान्त स्नातक की पढ़ाई की हुई है और अधिकतर समय जनता के बीच बिताते हैं।
मंत्री ने दिलवाया था टिकट
निकाय चुनाव के समय सतीश महाना ने यशोदा नगर वार्ड से प्रशांत को पार्षद का टिकट दिलाने में पैरवी की थी। कैबिनेट मंत्री ने प्रशांत को चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया था। प्रशांत शुक्ला बताते हैं कि उनके पिता अजय शुक्ला एक केमिकल सप्लायर के यहां नौकरी करते हैं। वह किराये के मकान में रहते हैं। उनकी मां घरेलू महिला हैं। एक छोटा भाई है। आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक न होने के कारण पिता ने चुनाव नहीं लड़ने को कहा। लेकिन हमने पार्षदी में उतरने का मन बना लिया था। कैबिनेट मंत्री ने जब चुनाव लड़ने को कहा तो हमने हामी भर दी। प्रशांत शुक्ला ने कहा कि वह चुनाव मैदान में उतरे और जनता ने उन्हें पास भी कर दिया। अब वह अपने क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा विकास का प्रयास करेंगे।
पिता की वेतन से चलता है घर का खर्चा
प्रशान्त ने बताया कि वो पढ़ाई में अव्वल थे और स्नातक तक प्रथम श्रृणी में उत्तीर्ण हुए। पिता प्राईवेट नौकरी करते हैं और उन्हीं की वेतन से गुजर-बसर होता है। कक्षा बारवीं में हमने संघ ज्वइन कर लिया और शाखाओं में जाने लगे। इसी के बाद से हमने घर-परिवार को त्याग दिया। जहां भी चुनाव होते वहां हम भाजपा के लिए जमीन तैयार करने के लिए जाते। एमपी विधानसभा में हमें जबलपुर भेजा गया, यहां हमने कई अदिवासी जिलों का दौरा किया। आदिवासियों के घर में रात गुजारी और भाजपा व संघ के मिशन से उन्हें अवगत कराया। लोकसभा चुनाव के वक्त हमें कानपुर नगर की जिम्मेदारी दी गई। 50 से ज्यादा वार्डों में हमने साइकिल व पैदल जाकर पीएम मोदी की बात लोगों के घर-घर पहुंचाई ।
Published on:
02 Dec 2017 08:09 am
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