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निकाय में हार के बाद एक्शन में आई मायावती, युवाओं के जरिए भाजपा से करेंगी मुकाबला

विधानसभा की दस में से दसों सीटें हारने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती को निकाय चुनाव में आस थी कानपुर में हाथी दहाड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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कानपुर. विधानसभा की दस में से दसों सीटें हारने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती को निकाय चुनाव में आस थी कानपुर में हाथी दहाड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मेयर के साथ ही 110 वार्डों में से महज दो और घाटमपुर नगर पालिका, बिठूर और शिवराजपुर नगर पंचायत में पार्टी बुरी तरह से हार गई। इसी के चलते मायावती ने पूरे जिले की इकाई को भंग कर दिया और यहां की बागडोर राशंकर कुरील को सौंप दी। जोनल कोआर्डिनेटर नौशाद अली ने बताया कि निकाय चुनाव के दौरान संगठन में बैठे पदाधिकारियों ने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार नहीं किया, जिसकी शिकायत मायावती से की गई थी। उनके आदेश के बाद जिलाध्यक्ष संजय गौतम को हटा दिया गया है। लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबला करने के लिए गांवों, मोहल्लों, बस्तियों और कस्बों में बड़े पैमाने पर युवाओं को बसपा से जोड़कर बहन मायावती व दिवंगत कांशीराम के सपने को पूरा किया जाएगा।


पूरी जिला इकाई भंग
विधानसभा चुनाव में बसपा ने कानपुर की सभी दसों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन मतगणना के बाद इनमें से एक भी जीत नहीं सका। हार के बाद बसपा सुप्रमो मायातवी ने कानपुर नगर की बागडोर अंटू मिश्रा को दी। नगर निकाय चुनाव में अंटू मिश्रा के कहने पर कई पार्षदों को टिकट दिया गया और खुद उन्होंने उम्मीदवारों को जिताने के लिए प्रचार किया पर मतगणना के दिन हाथी फिर नहीं दहाड़ सका। 110 वार्डों में से महज दो सीटें बसपा के झोली में आई। पार्टी ने घाटमपुर नगर पालिका, बिठूर और शिवराजपुर नगर पंचायत में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। लेकिन इन सीटों को जीतना तो दूर पार्टी के उम्मीदवारों की स्थिति बहुत ही दयनीय रही। जहां बसपा को वोटबैंक था, वहां भगवा फहराया। मायावती का वोटबैंक हाथी के बजाय भाजपा की तरफ गिरा। ऐसे कई वार्ड थे, जहां बसपा का अच्छा वर्चस्व था, मगर इस चुनाव में वहां पार्टी कोई करिश्मा नहीं दिखा सकी।


अर्चना के लिए नहीं किया प्रचार
नगर निगम के महापौर पद पर पार्टी ने अर्चना निषाद को प्रत्याशी बनाया। लेकिन जिला इकाई के किसी भी पदाधिकारी ने उनके लिए प्रचार नहीं किया। केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन और नामांकन के दिन भी अर्चना को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया था। परिणाम स्वरूप उन्हें करारी हार मिली। जोनल कोआर्डिनेटरों ने इसकी रिपोर्ट बसपा प्रमुख मायावती को दी थी। खुद अर्चना निषाद ने भी नेताओं की शिकायत मायावती से की। यही वजह है कि अब पार्टी मुखिया ने संजय गौतम को जिलाध्यक्ष पद से हटाने के साथ ही पूरी कमेटी को ही भंग कर दिया। जोनल कोआर्डिनेटर नौशाद अली ने बताया कि जिला संयोजक के पद पर तैनात रामशंकर कुरील को जिलाध्यक्ष बना दिया है। इस अवसर पर में रामशंकर ने कहा कि संगठन को मजबूत करने के साथ ही बहन मायावती व दिवंगत कांशीराम जी की पार्टी संबंधी नीतियों को आगे बढ़ाया जाएगा।


युवाओं की फौज खड़ी करेंगी मायावती
जोनल कोआर्डिनेटर नौशाद अली ने बताया कि भाजपा ने झूठ के दम पर केंद्र व प्रदेश में सरकार बना ली है, जिकसी पोल धीरे-धीरे कर खुलकर जनता के सामने आ रही है। जोनल कोआर्डिनेटर नौशाद अली ने कहते हैं कि 2012 और 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के कारण हमारे पद के कुछ नेता थे। उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की, जिसके चलते बसपा को इन दोनों चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। पार्टी ने ऐसे सभी नेताओं को बाहर कर युवाओं के लिए द्धार खोल दिए हैं। अब 26 जनवरी के बाद प्रत्येक विधानसभा में बूथ लेबल पर बूथ एजेंट की नियुक्त करेंगे। साथ ही ज्यादा से ज्यादा युवतियों और महिलाओं को पार्टी की सदस्यता दिलवाएगी।