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कानपुर की डिफाल्टर घोषित श्रीलक्ष्मी कॉटसिन पर सीबीआई ने की छापेमारी, 1993 में रखीं गई थी नींव

-डिफाल्टर घोषित हुई कानपुर की श्रीलक्ष्मी कॉटसिन पर सीबीआई छापा-तीन वर्ष पहले डिफाल्टर घोषित होने वाली कानपुर की तीसरी कंपनी
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कानपुर

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Arvind Kumar Verma

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Updated: 7 Aug 2021, 2:30 PM IST

कानपुर की डिफाल्टर घोषित श्रीलक्ष्मी कॉटसिन पर सीबीआई ने की छापेमारी, 1993 में रखीं गई थी नींव

कानपुर की डिफाल्टर घोषित श्रीलक्ष्मी कॉटसिन पर सीबीआई ने की छापेमारी, 1993 में रखीं गई थी नींव

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. तीन वर्ष पहले 6000 करोड़ की डिफाल्टर घोषित की गई कानपुर की श्री लक्ष्मी कॉटसिन पर सीबीआई ने छापेमारी की है। इसके कृष्णापुरम स्थित मुख्यालय सहित मलवां स्थित प्लांट्स में सीबीआई की टीम ने जांच शुरू की है। बताया गया कि कॉट्सिन के एमडी एमपी अग्रवाल अपनी बीमार पत्नी का एस्कॉर्ट्स अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। श्रीलक्ष्मी कॉटसिन का मुख्यालय कृष्णापुरम में हैं और इसके प्लांट फतेहपुर, हरियाणा, नोएडा, उत्तराखंड में हैं।

डिफाल्टर घोषित श्रीलक्ष्मी कॉटसिन के अधिग्रहण के लिए पहले दो विदेश की कंपनियों से बात हुई, लेकिन उनके मना करने के बाद महाराष्ट्र की नामी कंपनी वेलस्पन ने रुचि जताई। मगर यहां भी बात नहीं बनी। कानपुर की रोटोमैक ग्लोबल और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के बाद श्रीलक्ष्मी कॉटसिन तीसरी कंपनी है, लेकिन रकम के डिफॉल्ट के मामले में सबसे बड़ी कंपनी है। श्रीलक्ष्मी कॉटसिन कंपनी की नींव कानपुर में 1993 में रखी गई। शुरुआत में बुलेटप्रूफ जैकेट्स के अलावा कई प्रतिरक्षा उत्पाद बनाए और फिर ब्लास्टप्रूफ वाहन बनाए।

इसके बाद 2005-06 में कंपनी ने डेनिम कपड़े के उत्पादन की तरफ रुख अपनाया। इसके लिए बैंकों से करीब 85 करोड़ रुपए का लोन लिया गया। जब काम सफल रहा तो रुड़की और हरियाणा में भी यूनिटें लगाई गईं। 2006 में कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी कर दी। 2010 में टेक्निकल टेक्सटाइल के उत्पादन के लिए सेंट्रल बैंक से 693 करोड़ रुपए, इक्विटी बाजार से 200 करोड़ और अपनी तरफ से 100 करोड़ रुपए के निवेश का खाका तैयार किया।