
कानपुर. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ बुधवार को बिठूर महोत्सव का शुभारंभ करने के लिए क्रांतिकारियों के गढ़ बिठूर पहुंचे। उन्होंने इस दौरान पत्थर घाट स्थित गंगा की आरती कर उसके जल को निर्मल बनाने का संकल्प लिया। लेकिन जब सीएम गंगा को मैली बता रहे थे, तभी एक सच और सामने आया। पत्थर घाट के आसपास जल की एक बूंद नहीं थी। जिला प्रशासन ने मंगलवार की रातों-रात जल की धारा को बिठूर की तरफ मोड़कर उसे काशी की तरह तब्दील कर दिया। स्थानीय लोगों की मानें तो पत्थरघाट से गंगा काफी दूर चली गई थी। सीएम की आरती के चलते घाट को पहले बनारस की तरह गढ़ा गया और गंगाबैराज के कई गेट बंद करा पानी को यहां तक पहुंचाया गया।
गेट बंद कर पत्थर घाट तक पहुंचाया गया जल
सीएम योगी आदित्यनाथ की पहल पर बुधवार को बिठूर महोत्सव का धूम-धाम के साथ आगाज हो गया। पांच दिवसीय महोत्सव में भाग लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचे रंगारंग कार्यक्रम देख मंत्रमुग्ध हो गए। महोत्सव को शुभारंभ सीएम ने किया। लेकिन सीएम के पत्थर घाट पहुंचने से पहले एक बड़ी सामने निकल कर आई। घाट के आसपास गंगा की एक बुंद नहीं थी। पुरातत्व विभाग ने भी यहां आने-जाने वालों पर रोक लगाई हुई थी। पर सीएम की आरती के चलते प्रशासन ने रातों-रात पत्थर घाट तक पानी पहुंचाकर नजारा वाराणासी जैसा बना दिया। स्थानीय लोगों की मानें तो प्रशासन से मंगलवार की रात को गंगाबैराज के कई गेट बंद करा पानी का धारा बिठूर की तरफ मोड़ दी और जल को पत्थरघाट तक पहुंचाया।
पत्थरघाट पर लोगों के आने-जाने पर थी रोक
पत्थर घाट पर पर्यटकों के साथ ही भक्तों के लिए यहां आने-जाने पर रोक थी। लेकिन सीएम के आने के चलते जिला प्रशासन ने एक सप्ताह से डेरा जमा कर इसका रंग और रूप ही बदल दिया। स्थानीय निवासी बिरजू साहू ने बताया कि पुरातत्व विभाग के अफसर कुछ दिन पहले यहां आए थे और लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी थी। पहले सीएम को गंगा आरती के बजाय महोत्सव में भाग लेना था, लेकिन उन्होंने जैसे ही मां गंगा के दर्शन करने की इच्छा जताई वैसे ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया और यहां गंगा की धारा को मोड़कर लाया गया। साहू कहते हैं कि अगर ऐसे ही सरकारी बाबू धरोहरों को सहेजने के लिए सजग रहते तो न गंगा मैली होती और न ही धरोहरें नष्ट होती।
बदल गई सेहत और सूरत
बिठूर आने वाले लोग भी वहां का नजारा देखकर चकित थे। जो सड़कें पिछले कई दशक से गड्ढे भरी थीं, वो कितनी हो गईं। पत्थरघाट जहां इंसान तो दूर पक्षु-पक्षी भी कम दिखाई पड़ते थे वह बुधवार की शाम गुलजार था। आजादनगर निवासी अनूप गुप्ता कहते हैं कि हम बिठूर में किराने की दुकान चलाते हैं। तीस-त्योहरों पर हम गंगा स्नान के लिए जाते हैं, लेकिन पत्थरघाट पर पानी नहीं होने के चलते हमें बालू में चलकर जल तक पहुंचना पड़ता था, लेकिन सीएम के आने के बाद गुरू यहां का नजारा ही बदल गया। पत्थरघाट में भरपूर गंगा का जल और कॉशी जैसे तस्वीर देखकर सैकड़ों लोग दंग रह गए। सीता समाधि के बाहर चाय की दुकान चलाने वाले प्रेमराज कहते हैं कि चलिए सीएम ने भला कुछ दिया न हो पर उनके आने से यहां की साफ-सफाई जरूर हो गई।
गंगा के तट पर बनाया गया भगवा मंच
जिस पत्थरघाट पर सीएम ने महाआरती की वहां पर प्रशासन ने 20 लोगों के बैठने योग्य एक भव्य मंच बनाया था जो कॉशी के घाटों की तरह से दिख रहा था। आरती के साथ गंगा का भव्य नजारा देखते ही बन रहा था। सीएम योगी आदित्यनाथ के आगमन को देखते हुए घाट को भगवा रंग में सजाया गया है। पूरे मंच को ही भगवा रंग से रंगा गया है। यह देखने में काफी आकर्षक नजर आ रहा है। मंच से लेकर पूरे पंडाल में आकर्षक फूलों की सजावट भी की गई। इसके लिए बाहर से कारीगरों को बुलाया गया। गंगा आरती के लिए वाराणासी से पंडितों को बुलाया गया था। जिला प्रशासन ने आरती का पूरा स्वरूप कॉशी के घाटों की तरह रखा था।
Updated on:
21 Dec 2017 12:15 pm
Published on:
21 Dec 2017 08:38 am
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