
BRD Medical College
कानपुर. बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्रा व उनकी पत्नी को कानपुर के साकेत नगर स्थित एक मकान से यूपी स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने गिरफ्तार कर लिया। डॉक्टर दंपती कानून से बचने के लिए यहां एक वकील के यहां ठहरे हुए थे और हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत के लिए प्रयास कर रहे थे। वहीं मकान मालिक अखिलेश दुबे मौके से भागने मे कामयाब रहा। एसटीएफ दोनों को कानपुर से सीधे लखनऊ ले गई। एटीएफ की रेड की खबर स्थानीय पुलिस प्रशासन तक को भी नहीं थी। वहीं मोहल्ले के लोगों ने बताया कि दो कार अखिलेश दुबे के घर के बाहर रूकीं और उनमें से सात से आठ लोग उतरे। वे लोग गेट खोलकर अंदर गए और कुछ ही देर के बाद बाहर एक महिला व पुरुष को कार में बैठाकर निकल गए।
डीजे हेल्थ की तहरीर पर दर्ज हुई थी एफआईआर
मालूम हो कि पिछले दिनों गोरखपुर के बीआरडी हॉस्पिटल में 60 से ज्यादा मासूम बच्चों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। मुख्य सचिव ने मामले की जांच कर रिपोर्ट सीएम योगी को सौपी। बाद में सीएम के निर्देश के बाद डीजी हेल्थ केके गुप्ता की तहरीर पर पुलिस नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इससे पहले आरोपी डॉक्टर कफील के संभावित ठिकानों पर भी एसटीएफ ने छापेमारी की थी, लेकिन आरोपी डॉक्टर वहां नहीं मिला था। मामले में 9 आरोपियों के खिलाफ डीजी हेल्थ केके गुप्ता की तहरीर पर हजरतगंज कोतवाली में 23 अगस्त को मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला गोरखपुर से जुड़ा हुआ था, इसलिए मामले में आगे की कार्रवाई के लिए गोरखपुर को जांच ट्रांसफर हो गई थी।
इन पर गिरी गाज
ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एजेंसी पुष्पा सेल्स के एमडी मनीष भंडारी, उदय प्रताप शर्मा, संजय कुमार त्रिपाठी, सुधीर कुमार पांडेय, डॉक्टर राजीव मिश्रा, डॉक्टर सतीश, डॉक्टर कफील, डॉक्टर पूर्णिमा शुक्ला और चीफ फार्र्मासिस्ट गजानंद जायसवाल के खिलाफ 23 अगस्त को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। बीआरडी कॉलेज के निलम्बित किए गए प्रिंसिपल डॉक्टर राजीव मिश्रा और होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी उनकी डॉक्टर पूर्णिमा शुक्ला को कानपुर से एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। आईजी लोक शिकायत विजय सिंह मीणा ने इस बात की जानकारी देने के साथ यह भी बताया कि मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
जांच के बाद खुलासा
एफआईआर में कहा गया है कि बीआरडी के पूर्व प्राचार्य राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी पुष्पा मिश्रा की ऑक्सिजन सप्लाई में कथित तौर पर पुष्पा सेल्स से डील थी। प्राचार्य ने पर्याप्त फंड होने के बावजूद 2016-17 में ऑक्सिजन सप्लाई से जुड़ी बकाया रकम को मंजूरी नहीं दी और वित्त वर्ष के आखिर में 2.5 करोड़ के इस बजट को लैप्स हो जाने दिया। एफआईआर में कहा गया है कि बीआरडी को 2017-18 में 4.54 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया गया, जिनमें से पुष्पा सेल्स से संबंधित 64 लाख रुपए की रकम का अप्रैल में तत्काल भुगतान किया जा सकता था, लेकिन मिश्रा ने ऐसा नहीं किया। इन गतिविधियों के कारण पुष्पा सेल्स ने 10 अगस्त को ऑक्सिजन की सप्लाई रोक दी, जबकि दोनों डॉक्टरों और कंपनी को यह पता था कि ऐसी स्थिति में अस्पताल में मौतें हो सकती हैं।
Published on:
29 Aug 2017 08:31 pm
