
इस आधुनिक खेती का दंश झेल रहे ये लोग, गुम हो रही प्राचीन प्रणाली, आप भी जानिए
कानपुर देहात-इस आधुनिक युग में जिस तरह लोग खानपान व पहनावे में नए नए ढंग अपनाते हैं। इससे खेतीबाड़ी का कार्य भी अछूता नही है। इसके चलते कृषि के लिए प्रयोग किए जाने वाले उपकरण अपना अस्तित्व खो रहे हैं। जबकि पहले के समय में खरपतवार व घास फूस निकालने के लिए खेतों में लोहे के बने औजारों का अधिक प्रयोग किया जाता था। इससे किसानों का खर्च भी कम होता था और फसलें भी शुद्ध एवं सुरक्षित रहती थी। हालांकि मेहनत अधिक होती थी, लेकिन लोग स्वस्थ व हष्ट पुष्ट रहते थे। वहीं आज कम मेहनत के लालच में किसान खेतों में खड़ी फसलों में कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। उन दवाओं का सीधा असर आम जनमानस के स्वास्थ पर पड़ रहा है।
इन लोगों पर पड़ रहा बुरा प्रभाव
दरअसल अब बहुतायत में किसान सब्जी व फसलों में कीटनाशक दवाएं डालते हैं। जिसका असर बात तक बना रहता है और सब्जी व फल के माध्यम से आम जनमानस बीमार हो रहे हैं। हर किसी व्यक्ति को शुगर, कैंसर, टीवी सहित अन्य बीमारियां हो रही हैं जिसका इलाज तक मुश्किल हो रहा है। साथ ही कृषि कार्य मे प्रयोग होने वाले फावड़े, खुरपी, दरांती व अन्य कृषि उपकरण अब दूर होते जा रहे हैं। देखा जाए तो आज इस भागदौड़ भरी जिंदगी में नई पीढ़ियों को इन कृषि उपकरणों के नाम तक नही मालूम हैं। वहीं किसान भी मेहनत से बचने के लिए इनसे दूरियां बना रहे हैं। इसके चलते सैकड़ों लोग रोजगार से वंचित होते जा रहे हैं।
कृषि उपकरण निर्माता व्यवसायी बोले
खासतौर पर सड़क किनारे अपना आशियाना बनाकर बैठे लौहपिटवा (भड़गड़ा) समुदाय के लोग जीवन यापन को मसक्कत करने को मजबूर हैं। कृषि उपकरण बनाने वाले श्रीकांत ने बताया कि वह 10 वर्ष से कृष्ण उपकरण बनाने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि में कीटनाशक दवाओं के उपयोग से इस व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। अब परिवार का भरण पोषण भी मुश्किल होता है। जबकि फसलों में पड़ने वाली इन दवाओं से लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।
Published on:
19 Jul 2019 03:41 pm
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