7 सितंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नन्हे यात्रियों के लिए ‘वरदान’ होगा जीआरपी का री-कनेक्टअ ऐप

जीआरपी के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले व घर से नाराज होकर भागने वाले बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने अब जीआरपी के लिए काफी आसान हो जाएगा.
2 min read
Google source verification
Kanpur

नन्हे यात्रियों के लिए ‘वरदान’ होगा जीआरपी का री-कनेक्टअ ऐप

कानपुर। जीआरपी के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले व घर से नाराज होकर भागने वाले बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने अब जीआरपी के लिए काफी आसान हो जाएगा. जीआरपी व रेलवे की तरफ से दो दिन पूर्व लखनऊ में यूपी 100 में हुआ बाल संरक्षण व सुरक्षा पर राज्यस्तरीय सम्मेलन में रेलवे ने स्टेशनों में भटकने वाले नन्हे मुसाफिरों को उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए एक 'रीकनेक्ट’ ऐप तैयार करने की घोषणा की है, जिससे यूपी समेत देश के सभी स्टेशनों में तैनात रहने वाले जीआरपी व आरपीएफ स्टाफ जुड़ा होगा. इस ऐप में लावारिस मिलने वाले बच्चों की फोटो व डिटेल होगी.

अगले महीने तक तैयार हो जाएगा ऐप
एडीजी रेलवे बीके मौर्य ने बताया कि रेलवे के तैयार किए जा रहे एप के माध्यम से स्टेशनों में मिलने वाले नाबालिक बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाना जीआरपी व आरपीएफ के लिए आसान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि संभावना जताई जा रही है कि यह ऐप रेलवे सितंबर तक बना कर जीआरपी के हैंडओवर कर देगी. इसके बाद यूपी समेत देश के सभी जीआरपी थानों को इससे जोड़ दिया जाएगा.

ऐसा बताया जाआरपी इंस्‍पेक्‍टर ने
कानपुर सेंट्रल स्टेशन जीआरपी इंस्पेक्टर राम मोहन राय के मुताबिक घर से नाराज होकर भागने वाले बच्चों का सबसे पहला ठिकाना नजदीकी स्टेशन ही होता है. बीते दो माह में कानपुर सेंट्रल स्टेशन में मिलने 30 से अधिक बच्चों की उन्होंने काउंसलिंग की थी, जिसमें यह तथ्य उनके सामने आया था. घर से नाराज होकर भागे बच्चे नजदीकी स्टेशन में पहुंच किसी भी ट्रेन में बैठ जाते है, जोकि किसी बड़े स्टेशन में ट्रेन से उतर जाते हैं.

ऐसा बताया अधिकारियों ने
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रेलवे देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है. इस नेटवर्क का लाभ उठा कर जीआरपी व आरपीएफ को स्टेशन में मिलने वाले नाबालिक बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने में काफी सुविधाएं मिलेंगी. वर्तमान में स्टेशन पर मिलने वाले नाबालिक बच्चों के परिजनों की जानकारी कई दिनों के बाद मिलती है. इस लिए उन्होंने चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया जाता है.