
कानपुर,आईआईटी कानपुर में मानसिक तनाव के चलते बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए संस्थान प्रबंधन ने बड़ा फैसला लिया है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अब परिसर में ओपन फोरम शुरू किया जाएगा, जहां छात्र-छात्राएं बिना किसी डर और दबाव के अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकेंगे। खास बात यह होगी कि यहां केवल समस्याएं सुनी ही नहीं जाएंगी, बल्कि विशेषज्ञों के जरिए तुरंत समाधान और परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।
बीते डेढ़ साल में सामने आई आत्महत्या की घटनाओं ने न सिर्फ संस्थान,बल्कि केंद्र सरकार को भी गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया।इसी क्रम में 13 फरवरी को एक उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम ने आईआईटी कानपुर का दौरा किया।इस टीम में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ.जितेंद्र नागपाल, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन के पूर्व चेयरमैन डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे और उच्च शिक्षा मंत्रालय के निदेशक देवेंद्र कुमार शर्मा समेत कई विशेषज्ञ शामिल थे। टीम ने शिक्षकों और छात्रों से संवाद करने के साथ आत्महत्या की घटनाओं की जांच कर रही समिति के अध्यक्ष और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ.धनंजय चौधरी से भी विस्तृत चर्चा की। इसके अलावा वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक वाजपेयी से परिसर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति और जरूरतों पर मंथन किया गया।
निरीक्षण में सामने आया कि कई छात्र अकादमिक दबाव, अकेलेपन और निजी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए वेलनेस व्हाट्सएप ग्रुप को और मजबूत करने की सिफारिश की गई, ताकि छात्र सीधे अपनी समस्या साझा कर सकें और तुरंत काउंसलिंग व मनोवैज्ञानिक सहायता मिल सके।
वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.ए.के.वाजपेयी के मुताबिक, केंद्रीय टीम के सुझावों पर पहले से काम चल रहा है। व्हाट्सएप ग्रुप पहले से सक्रिय है और अब ओपन फोरम को औपचारिक रूप से शुरू किया जाएगा,जिससे संवाद का दायरा और छात्रों का भरोसा दोनों बढ़ेगा।
Published on:
19 Feb 2026 03:50 pm
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