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ITBP जवान की मां का कटे हाथ पर सस्पेंस गहराया, पहचान और जांच के बीच उलझा मामला, डीएनए रिपोर्ट से खुलेगा राज

ITBP Case Kanpur:कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां के कटे हाथ की पहचान और जांच का मामला उलझ गया है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज डीएनए जांच के बाद हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की बात कर रहा है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच पत्राचार जारी है।
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कानपुर

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Avanish Kumar

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Updated: 3 Jun 2026, 1:01 PM IST

ITBP, Kanpur News

ITBP जवान अपनी मां के कटे हुए हाथ के साथ (फाइल फोटो- पत्रिका)

Medical Negligence : कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां के इलाज से जुड़े मामले में सामने आया कटे हुए हाथ की जांच अब जटिल मोड़ पर पहुंच गई है। इलाज में कथित लापरवाही के बाद हुए इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बीच पत्राचार का नया दौर शुरू कर दिया है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जांच के लिए भेजा गया हाथ वास्तव में किसका है, इसकी पुष्टि कैसे हो। इसी को लेकर अब पहले डीएनए जांच और फिर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच कराने की तैयारी की जा रही है। मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है और जवान न्याय की उम्मीद में रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

मामला क्या है: इलाज के बाद कटे हाथ की जांच पर सवाल

पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब आईटीबीपी जवान की मां के इलाज के दौरान कथित लापरवाही के बाद उनका हाथ काटे जाने की बात सामने आई। इसके बाद जांच के लिए हाथ को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज भेजा गया। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जो हाथ जांच के लिए रखा गया है, वह वास्तव में मरीज का ही है या नहीं।
इसी आशंका के चलते जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले पहचान की पुष्टि को जरूरी माना जा रहा है।

डीएनए जांच पर जोर, पहले पहचान फिर फोरेंसिक परीक्षण

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अब स्पष्ट किया है कि पहले डीएनए जांच कराई जाएगी, ताकि यह पुष्टि हो सके कि बॉक्स में रखा गया अंग उसी आईटीबीपी जवान की मां का है। इसके बाद ही हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कॉलेज का कहना है कि बिना पहचान की पुष्टि के फोरेंसिक रिपोर्ट का कोई वैज्ञानिक आधार कमजोर पड़ सकता है। प्राचार्य प्रो. संजय काला के अनुसार 16 दिन पुराने अंग की जांच में केवल गहन फोरेंसिक और डीएनए विश्लेषण ही सही परिणाम दे सकता है।

GSVM मेडिकल कॉलेज और प्रशासन के बीच पत्राचार तेज

GSVM Medical College की ओर से पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर छह सदस्यीय टीम के गठन की बात कही गई है। वहीं सीएमओ कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि पुलिस ने जांच के लिए हाथ भेजा था और आगे की प्रक्रिया कॉलेज को तय करनी है। इस पूरे मामले में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज के बीच लगातार पत्राचार जारी है, जिससे जांच प्रक्रिया धीमी होती जा रही है।

आगे की जांच और बढ़ते सवाल

अब पूरा मामला डीएनए रिपोर्ट पर टिक गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच आगे बढ़ सकेगी। दूसरी ओर, आईटीबीपी के जवान लगातार जांच की प्रगति पर नजर बनाए हुए है।