
कानपुर में गर्मी की दस्तक के साथ ही एक बार फिर ब्लड बैंकों पर संकट गहराने लगा है। शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों—एलएलआर अस्पताल और उर्सुला अस्पताल—की ब्लड बैंक में खून का स्टॉक तेजी से घट रहा है। हालात ऐसे हैं कि जहां सामान्य दिनों में एक से दो हजार यूनिट तक खून का भंडारण रहता है, वहीं इन दिनों यह घटकर महज 200 से 250 यूनिट तक सिमट गया है।
गर्मी के मौसम में हर साल ब्लड बैंकों में खून की कमी देखी जाती है। इसका मुख्य कारण रक्तदान शिविरों की संख्या में गिरावट और लोगों का कम भाग लेना है। तेज धूप और लू के कारण लोग घरों से कम निकलते हैं, जिससे स्वैच्छिक रक्तदान प्रभावित होता है। इसके अलावा, कई नियमित रक्तदाता भी इस मौसम में स्वास्थ्य कारणों से रक्तदान टाल देते हैं। परिणामस्वरूप अस्पतालों में खून का स्टॉक तेजी से घटता है और इमरजेंसी सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे मरीजों और परिजनों की परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं।
शहर में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की स्थिति इस संकट में सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है। एलएलआर अस्पताल की ब्लड बैंक पर निर्भर करीब 170 बच्चों को नियमित रक्त की जरूरत होती है। ऐसे में जब ब्लड स्टॉक घटा, तो डॉक्टरों ने खुद आगे आकर रक्तदान शुरू किया। यह कदम न केवल इन बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि समाज को भी प्रेरित करता है। डॉक्टर अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद समय निकालकर रक्तदान कर रहे हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और कोई भी बच्चा खून की कमी से प्रभावित न हो।
इस समय ब्लड बैंकों में ए और एबी पॉजिटिव ग्रुप के खून का सबसे ज्यादा संकट बना हुआ है। एलएलआर अस्पताल और उर्सुला अस्पताल दोनों जगह इन ग्रुप्स का स्टॉक बेहद सीमित है। बचा हुआ खून केवल इमरजेंसी और सर्जरी के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। उर्सुला अस्पताल में स्थिति और गंभीर है, जहां चंद यूनिट खून से ही भर्ती मरीजों का काम चलाया जा रहा है। इससे बाहरी मरीजों को खून के लिए भटकना पड़ रहा है और उपचार में देरी की आशंका बढ़ गई है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन विभाग की डॉ. लुबना खान ने बताया कि गर्मी में खून की कमी आम बात है, लेकिन इसे जागरूकता से दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कई रक्तदाता खुद आगे आते हैं, जबकि पुलिस, प्रशासन और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से शिविर भी लगाए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब भी जरूरत होती है, मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक स्वयं रक्तदान करते हैं। उन्होंने शहरवासियों से अपील की है कि अधिक से अधिक लोग रक्तदान करें, ताकि किसी भी मरीज की जान खतरे में न पड़े।
Updated on:
31 Mar 2026 01:48 pm
Published on:
31 Mar 2026 01:48 pm
