
कानपुर। नौकरी के दिनों में सैलरी से कटने वाला भविष्य निधि (पीएफ) अगर बरसों से निष्क्रिय पड़ा है, तो अब चिंता छोड़िए। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) निष्क्रिय पीएफ खातों में जमा धन को उसके असली हकदारों तक पहुंचाने की बड़ी मुहिम शुरू कर चुका है। तीन साल से अधिक समय से बंद पड़े खातों की पहचान कर राशि लौटाई जाएगी। बस शर्त है, केवाईसी पूरी हो।
निष्क्रिय खातों तैयार की जा रही है सूची -
क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय ने निष्क्रिय खातों की सूची तैयार करने का काम तेज कर दिया है। वर्ष 2012 से पहले पीएफ खाते मैनुअल होते थे, जिनका डाटा कंप्यूटरीकृत नहीं था। अब उसी पुराने रिकार्ड को खंगालकर निष्क्रिय खातों की पहचान की जा रही है। इस कार्यालय से जुड़े 15 जिलों—कानपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, जालौन, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट और फतेहपुर—में वर्तमान में 3,29,526 सक्रिय खाते दर्ज हैं। बीते एक साल में ही इनमें 418 करोड़ रुपये का अंशदान जमा हुआ है, जबकि निष्क्रिय खातों में भी बड़ी रकम फंसी होने की संभावना है।ईपीएफओ ने साफ किया है कि बैंकों की तरह अब तीन साल से अधिक समय तक निष्क्रिय रहे खातों की जमा राशि खाताधारकों को वापस की जाएगी और खाते बंद कर दिए जाएंगे। इसके लिए खाताधारकों को पीएफ खाते की केवाईसी करानी होगी। केवाईसी के बाद ऑनलाइन क्लेम के जरिए भुगतान सीधे खाते में मिलेगा।
देना होगा संयुक्त घोषणा पत्र
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त प्रथम शाहिद इकबाल ने बताया कि केवाईसी अपडेट के लिए खाताधारक और उस समय के नियोक्ता का संयुक्त घोषणा पत्र आवश्यक होगा। साथ ही आधार कार्ड, हाईस्कूल प्रमाणपत्र समेत सभी जरूरी दस्तावेज क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय में जमा करने होंगे। प्रक्रिया पूरी होते ही ऑनलाइन क्लेम स्वीकार किया जाएगा।उन्होंने यह भी बताया कि पुराने मैनुअल खातों में अक्सर खाताधारकों का पता उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में नियोक्ताओं से जानकारी जुटाकर खाताधारकों से संपर्क किया जाएगा। यदि आपने नौकरी बदली, पीएफ खाता छूट गया या वर्षों से कोई गतिविधि नहीं हुई तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है। एक केवाईसी कराइए और वर्षों से सोया आपका पीएफ फिर से जाग उठेगा।
कानपुर में निष्क्रिय पीएफ खातों से राशि वापसी की पहल को लेकर लोगों ने राहत और उम्मीद जताई है। अलग-अलग इलाकों से सामने आए अनुभव इस योजना की जरूरत और असर को साफ दिखाते हैं।
सुनीता विश्वकर्मा, निवासी गुरुदेव पैलेस, कानपुर, ने बताया कि उन्होंने करीब 10 साल पहले नौकरी की थी, लेकिन पीएफ का पैसा निकालना भूल गई थीं। कई बार प्रयास के बावजूद राशि नहीं मिल सकी। इस नई व्यवस्था से उन्हें उम्मीद है कि उनके साथ-साथ सैकड़ों ऐसे लोगों को भी फायदा मिलेगा और मेहनत की कमाई वापस मिल सकेगी।
अनुराग तिवारी, निवासी माल रोड, ने कहा कि वे अपना पीएफ अकाउंट नंबर तक भूल चुके थे। जब बाद में नंबर मिला और पैसा निकालने की कोशिश की तो काफी दिक्कतें आईं, जिससे उन्होंने प्रयास छोड़ दिया। अब इस योजना से उन्हें फिर से उम्मीद जगी है कि उनका पैसा मिल जाएगा।
सत्यम सिंह, निवासी काकादेव, का कहना है कि यह सरकारी पहल बेहद लाभदायक साबित होगी। हजारों लोगों का पीएफ पैसा खातों में फंसा है, जो छोटी-छोटी तकनीकी वजहों से नहीं निकल पा रहा था। अब ऐसे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
अजय वर्मा, निवासी आवास विकास, ने योजना को उपयोगी बताया, लेकिन एक सवाल भी उठाया। उनका कहना है कि कई लोग अपना पीएफ अकाउंट नंबर और दस्तावेज तक भूल चुके हैं। ऐसे मामलों में क्या प्रक्रिया होगी, यह स्पष्ट होना चाहिए। बावजूद इसके, उनका मानना है कि यह योजना कुल मिलाकर काफी कारगर सिद्ध होगी।
Updated on:
25 Feb 2026 10:17 am
Published on:
25 Feb 2026 09:34 am
