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Kanpur News:जिंदा होकर भी मर चुका! सिस्टम की एक गलती ने छीन ली पहचान, राशन से बैंक तक सब बंद

Health Department Negligence:स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से एक समाजसेवी को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। राशन, बैंक, आधार और अन्य दस्तावेज अमान्य हो गए।बीते जनवरी में खुलासा होने पर वह सुधार के लिए भटकने को मजबूर हैं।

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कानपुर में प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक जिंदा युवक को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। मामला तब उजागर हुआ, जब युवक राशन लेने पहुंचा और उसे बताया गया कि वह तो रिकॉर्ड में “मर चुका” है।

एक लावारिस को कराया था भर्ती -

गोविंद नगर क्षेत्र के निराला नगर निवासी गौरव शाहू की पहचान समाजसेवा से जुड़ी हुई है। वह वर्षों से लावारिश लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराने और उनकी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाते हैं। गौरव के अनुसार, 7 सितंबर 2025 को उन्होंने एक लावारिश मरीज को मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान 12 सितंबर 2025 को उस मरीज की मौत हो गई। इसी दौरान अस्पताल स्तर पर हुई गंभीर चूक ने गौरव की जिंदगी को उलट-पलट कर रख दिया।

गौरव का आरोप है कि पैरोकारी के दौरान उनके आधार कार्ड की प्रति अस्पताल में लगी थी। डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही से मृत मरीज की जगह उन्हें ही कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से 12 सितंबर 2025 की तारीख का डेथ सर्टिफिकेट उनके नाम से जारी कर दिया गया। विडंबना यह रही कि उसी “मृत” व्यक्ति यानी गौरव ने उस लावारिश शव का अंतिम संस्कार भी कराया।

सभी डॉक्यूमेंट दिखने लगे अमान्य -

इस गंभीर गलती की भनक गौरव को जनवरी 2026 में लगी, जब वह सरकारी राशन लेने पहुंचे। राशन डीलर ने बताया कि उनका नाम राशन कार्ड से हट चुका है। पहले तो उन्हें लगा कि कोई तकनीकी गलती होगी, लेकिन परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। बैंक से पैसे निकालने गए तो खाता ब्लॉक मिला। आधार कार्ड की जांच कराई तो वह इनवैलिड हो चुका था। ड्राइविंग लाइसेंस और पैन कार्ड भी अमान्य दिखने लगे।

यह नहीं है हमारे बस का -

गौरव बताते हैं कि जब उन्होंने अस्पताल जाकर सुधार कराने की कोशिश की, तो प्रशासन ने साफ कह दिया कि “यह हमारे बस में नहीं है।” इसके बाद से वह स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और अन्य दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कागजों में मृत घोषित होने के कारण उनकी पहचान, सुविधाएं और अधिकार सब छिन गए हैं।हालांकि,वही पूरे मामले को लेकर सीएमओ कानपुर ने जांच कर कार्यवाही की बात कही है।