
कानपुर. हर कोई मौत से डरता है। लेकिन, ये मां-बेटी मौत मांग रही हैं। पिछले कई सालों से हर रोज यह प्रार्थना करती हैं कि इन्हें भगवान मौत दे दे। या फिर सरकार इन्हें मौत की नींद सुला दे। इसके लिए मां-बेटी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को कई बार पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की याचना कर चुकी हैं। लेकिन, कहीं सुनवाई नहीं हुई। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है तो मां बेटी को उम्मीद जगी है उनकी आस भी पूरी होगी। उनके चेहरे पर लंबे समय बाद मुस्कान जगी है।
बड़ी मार्मिक है कहानी
कानपुर के यशोदानगर स्थित शंकराचार्य नगर में रहती हैं शशि मिश्रा और इनकी इकलौती बेटी अनामिका मिश्रा। अनामिका 33 साल की हैं जबकि शशि की उम्र 55 साल से ज्यादा है। यह मां बेटी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक अजीब बीमारी से पीडि़त हैं। इस बीमारी में व्यक्ति चलने फिरने में असर्मथ हो जाता है। शरीर अकड़ जाता है। बीमारी धीरे-धीरे शरीर को अपनी चपेट में लेती है और एक दिन व्यक्ति अपाहिज होकर बिस्तर पर पहुंच जाता है। शशि को 1985 से इस बीमारी ने अपनी चपेट में लिया और अब वह पूरी तरह से बिस्तर पर हैं। जबकि बीकॉम तक की पढ़ाई कर चुकी अनामिका पिछले सात साल से इस बीमारी की चपेट में आई हैं। अब वह भी विकलांग हो चुकी हैं। किसी तरह घिसट-घिसट कर जीवन जी रही हैं।
घर में नहीं है कोई कमाने वाला
शशि मिश्र के पति की 15 साल पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद घर की हालत धीरे-धीरे खराब होने लगी। पहली शशि के इलाज और बाद में बेटी अनामिका के इलाज में घर में रखी सारी जमापूंजी खत्म हो गई। रिश्तेदारों ने मदद की लेकिन बाद में उन्होनें भी किनारा कर लिया। अब स्थिति यह है कि दोनों का बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो गया है। मां-बेटी मोहल्ले के लोगों के रहमोकरम पर जीने का मजबूर हैं। अनामिका ने बीकॉम किया है। वह कहती हैं कि पिता बिजनेस मैन थे। मां की की तबियत 1985 में अचानक खऱाब हुई थी। जब तक पिता जी थे उन्होंने इलाज कराया। उनके निधन के बाद घर की जमा पूंजी व जमीन बेच कर इलाज कराते रहे। इस बीच अनामिका ने स्कूल में पढ़ाया। कोचिंग पढ़ाकर मां का इलाज कराया और घर के खर्चें चलाये। लेकिन अब इस बीमारी ने उसे भी अपनी चपेट में ले लिया। चार साल से वह भी बिस्तर पर है।
नहीं हुई कहीं सुनवाई
मां और बेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 16 जनवरी 2015 को इच्छा मृत्यु का पत्र लिखा था। इसके बाद 13 अगस्त 2017 को राष्ट्रपति को पत्र लिखा। 14 सितंबर 2017 को राष्ट्रपति को खून से इच्छा मृत्यु का पत्र लिखा लेकिन कुछ नहीं हुआ। हां, यूपी सरकार ने 50 हजार की आर्थिक मदद की थी जो राशि एक माह के इलाज में ही खत्म हो गयी।
हम हर पल मर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने हमारी सुन ली
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अनामिका और शशि कहती हैं कि यह फैसला बहुत पॉजिटिव हूं। जब कोई इच्छा मृत्यु के लिए निवेदन करता है तो इसके पीछे बहुत से कारण होते है। यानि आदमी जिंदा नहीं रहना चाहता। इस चीज को कोर्ट ने कंसीडर किया है। कोर्ट का यह बहुत ही पॉजिटिव स्टेप है। हम लोग फिजिकली ,मेंटली ,इमोशनली सरवाइव नहीं कर पा रहे हैं यह बहुत ही अच्छा डिसीजन है। हर पल मर रहे है और वेट कर रहे हैं अपनी मौत का। रोज की तकलीफ से एक दिन की तकलीफ बहुत अच्छी है। मेरी मां 27 साल से बेड पर हैं। यह मेरे लिए बहुत अच्छी खबर है, मैं देखूंगी कैसे मर्सी किलिंग के लिए आवेदन करना है, इस प्रोसेस को समझूंगी। फिर आवेदन करूंगी। हमें इच्छा मृत्यु का इंतजार है।
जानिए क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रोग के कारण मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। यह रोग पांच वर्ष की आयु से पहले ही बच्चों में शुरू हो जाता है। शुरू में तो इस रोग का मां-बाप को भी पता नहीं चलता हौ उन्हें तब पता चलता है जब उनका बच्चा चल नहीं पाता है। इस रोग की शुरूआत में बच्चों की चाल ठीक नहीं होती है तथा तीन साल की आयु के बच्चे की चाल में विकृति आ जाती है। इस रोग के कारण बच्चा एड़ी को उठाकर चलने लगता है। इस रोग के कारण रोगी की रीढ़ की हड्डी में भी टेढ़ापन आ जाता है जिसके कारण उसे उठने-बैठने में तकलीफ होने लगती है।
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी रोग के कारण रोगी को कई प्रकार के कामों को करने में दिक्कत होती है। इस रोग से पीड़ित रोगी का अगर जल्द ही उपचार न किया जाए तो 20 से 22 वर्ष की आयु में ही उसकी चलते-फरिने की शक्ति समाप्त हो जाती है तथा जब रोग अधिक गंभीर हो जाता है तो रोगी को सांस लेने में कष्ट होने लगता है तथा उसे ह्दय रोग भी हो जाता है।
Updated on:
10 Mar 2018, 2:11 PM IST
Published on:
10 Mar 2018, 1:31 PM IST
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