
कोविड में बेसहारा हुई मासूम को कहीं इस वजह से तो गोद लेना नहीं चाहते, चाइल्ड लाइन ने जताई ऐसी संभावना
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. कोरोना (Corona Virus Period) की इस आपदा में कई परिवारों के उजड़ने से बच्चे अनाथ (Orphan Child In Covid) हो गए। ऐसे बच्चो के सामने जीवन यापन व उनकी देखरेख की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इसके अतिरिक्त माता-पिता के निधन के बाद छोड़ गए संपति भी उस बेसहारा के लिए जी जंजाल बन सकती है। हालांकि चाइल्ड हेल्पलाइन (Child Helpline) की मदद से कई अपनों ने हांथ बढ़ाए हैं। मगर चाइल्ड हेल्पलाइन के कार्यकर्ताओं के मुताबिक ऐसे बच्चों को संपत्ति के लालच में रिश्तेदार गोद (Adopt Orphan Child) ले सकते हैं। कानपुर में चाइल्ड लाइन के सामने एक ऐसा ही मामला आया, जिसमें उन्होंने प्राथमिक जांच में संभावना भी जताई। फिलहाल इन बेसहारा बच्चो के संरक्षक के लिए चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ता हर तरीके की जांच परख कर रहे हैं। कार्यकर्ता गोद लेने वालों के संबंध में पूरी जानकारी जुटा रहे हैं।
यशोदा नगर की बेसहारा बच्ची के लिए आए कई
दरअसल कानपुर के यशोदानगर में एक दंपति की कोविड से मौत होने के बाद 8 वर्ष की बच्ची बेसहारा हो गई। उसकी संपत्ति की मालकिन अब स्वयं वह बच्ची ही है। उसे गोद लेने के लिए कई रिश्तेदारों ने हामी भरी। चाइल्ड लाइन कार्यकर्ताओं के अनुसार कानूनी प्रक्रिया से गोद लेने के लिए रिश्तेदार को कई बार बुलाया, लेकिन वे नहीं पहुंचे। जब कार्यकर्ताओं ने आस पड़ोस में जानकारी जुटाई तो पता चला कि संपत्ति के लोभ में कई लोग उसे गोद लेने की फिराक में हैं। एक रिश्तेदार ने भी दावा किया है। फिलहाल रिश्तेदार के बारे में भी अब चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ता पता लगा रहे हैं।
गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया से बच रहे लोग
चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ता बताते हैं कि बच्ची को गोद लेने वाले रिश्तेदार अब उसे कानूनी रूप से गोद लेना नही चाहते हैं। इसी वजह से कई बार बुलाने के बावजूद वह नहीं आए। बताया कि विधिक रूप से गोद लेने के बाद कानूनी तौर पर वह बच्चे के अभिभावक हो जाएंगे। इससे बच्ची को भी कई कानूनी अधिकारी मिल जाएंगे। इसके साथ ही रिश्तेदार को भी उस बच्ची का पालन पोषण खुद के बच्चों की तरह ही करना होगा।
Published on:
18 May 2021 05:11 pm
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