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वे 57 साल के हैं, 36 साल हो गए उन्हें रोज साइकिल से ही बैंक में नौकरी करते, 25 पैसे प्रतिघंटे के किराए पर चलानी सीखी थी

लोग जहां धनतेरस पर एक से बढ़कर एक लग्जरी वाहन खरीदते हैं, वहीं गोपाल सिंह हर वर्ष नई साइकिल खरीदते हैं..
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करौली

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Vijay ram

Jun 23, 2018

वे 75 साल के हैं, 36 साल हो गए उन्हें रोज साइकिल से ही बैंक में नौकरी करते, 25 पैसे प्रतिघंटे के किराए पर चलानी सीखी थी

वे 75 साल के हैं, 36 साल हो गए उन्हें रोज साइकिल से ही बैंक में नौकरी करते, 25 पैसे प्रतिघंटे के किराए पर चलानी सीखी थी

करौली.
57 वर्ष की आयु पार कर चुके राजस्थान में हिण्डौन के एक बैंक अधिकारी अपने जोश-स्फूर्ति के बूते बुढ़ापे में भी युवाओंं के लिए मिसाल हैं।

सुबह 10 किलोमीटर मॉर्निंग वॉक, साइकिलिंग और व्यायाम बाद में दिनभर बैंक में नौकरी। फिर भी युवाओं से ज्यादा चुस्त-दुरुस्त। इनका नाम है गोपाल सिंह बेनीवाल। कब तक जीएंगे इसका तो किसी को नहीं पता, लेकिन जो भी इन्हें देखता व सुनता है, इनके बारे में जरूर सोचने लगता है।

गोपाल खुद की सेहतमंदी का राज नियमित 10-12 किलोमीटर साइकिल चलाना बताते हैं। वे पिछले 45 साल से साइकिल को ही वाहन के रूप में उपयोग करते आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 3 जून को घोषित किए विश्व साइकिल दिवस (world cycling day) पर बेनीवाल ने साइकिल को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। हाल ही निकले उस विशेष दिन को भी वह साइकिल से ड्यूटी करना नहीं भूले।

राजस्थान पत्रिका के संवाददाता ने उनसे सवाल पूछे तो बताया कि
10 वर्ष की उम्र में वे 25 पैसे प्रतिघंटा के किराए पर छोटी साइकिल लिया करते और उसे चलाना सीखा। इसके चलते साइकिल से ही ऐसा लगाव हुआ कि बैंक में नौकरी मिलने के बाद भी बाइक नहीं खरीदी।

वर्ष 1978 में कॉमर्स कॉलेज में पढऩे के दौरान गोपाल 4 रुपए का भाड़ा चुका एक रोडवेज बस से अपनी साइकिल को जयपुर ले गए और हर रोज घर से कॉलेज तक 12 किलोमीटर का सफर साइकिल से तय किया। वह मूल रूप से जाट की सराय के रहने वाले हैं।

उनका कहना है कि अब समय और सम्पन्नता से लोग कार व बाइक उपयोग करने लगे हैं, लेकिन वे पिछले 36 वर्ष से रोज साइकिल से ही बैंक शाखा जाते हैं। रोजमर्रा के कामकाज के लिए भी साइकिल ही वाहन है।

धनतेरस पर साइकिल ही खरीदते
लोग जहां धनतेरस पर एक से बढ़कर एक लग्जरी वाहन खरीदते हैं, वहीं गोपाल सिंह हर वर्ष नई साइकिल खरीदते हैं। महंगे वाहन की भांति उसका सार संभाल भी करते हैं। पहली साइकिल उन्होंने 500 रुपए में खरीदी थी।

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दिवाली पर कार के साथ साइकिल पूजन
दीपावली पर वाहन पूजन की परम्परा होने से गोपालसिंह दशकों से बतौर वाहन साइकिल का पूजन करते हैं। 3 साल से पुत्र के पास लग्जरी कार है। लेकिन वे कार के साथ साइकिल का पूजन और मौली बंधन करना नहीं भूलते हैं।

सरकार से हैं इसलिए खफा
गोपाल कहते हैं कि जहां भी देखें हमारे शहर में साइकिलिंग ट्रेक सरकार ने नहीं बनवाया। ऐसे में बच्चे आज भी मोहल्लों व कॉलोनियों की गलियो में ही साइकिल चलना सीखते हैं। वैसे, जमाना इतना बदल गया है कि बाइक के दौर में साइकिल अब किराए पर भी नहीं मिलती।

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