
नवसंवत्सर पर कैला मां के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब
करौली. उत्तरभारत प्रसिद्ध आस्थाधाम कैलादेवी में चल रहे चैत्र लक्खी मेले में शनिवार को नवसंवत्सर के मौके पर आस्था का सैलाब उमड़ा। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार इस मौके पर 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर मनौती मांगी।
इस दौरान पूरा परिसर कैलामाता के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। खचाखच भरी रैलिंगों में भक्त दर्शनों के इंतजार के बीच माता के गुनगान में डूबे नजर आए। हालांकि भीड़ के चलते श्रद्धालुओं को माता के दर्शनों की खातिर दो से ढाई घण्टे इंतजार करना पड़ा। इस मौके पर रात्रि को घट स्थापना के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान भी शुरू किए हैं।
नवसंवत्सर पर माता के दर्शनों की खातिर कैलादेवी में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई, जो देर रात से ही नवसंवत्सर की पहली भोर में कैलामाता के दर्शन करने के लिए रैलिंगों में जा पहुंचे। रात करीब 11 बजे से मंदिर परिसर की रैलिंगों में श्रद्धालुओं का पहुंंचना शुरू हो गया और तड़के तक तो रैलिंग खचाखच हो गई। सुबह 4 बजे मंगला आरती पर जैसे ही माता के पट खुले पूरा परिसर कैला मय्या के जयकारों से गूंज उठा। दिन चढऩे के साथ ही भीड़ भी बढ़ती गई और तीसरे पहर बाद तक रैलिंगों में कतार लगी रही। हालांकि गर्मी और भीड़ के चलते बच्चों-बुर्जुगों की बुरी गत बन गई। गौरतलब है कि कैलामाता को लक्ष्मी स्वरूपा माना जाता है। इस कारण वर्ष के प्रारंभ में माता के दर्शन को शुभ मानने की धार्मिक मान्यता है। इस मान्यता के कारण हर वर्ष नवसंवत्सर पर श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ रहती है। धार्मिक मान्यता है कि नवसंवत्सर के अवसर पर माता के दर्शन करने से वर्षभर अच्छा गुजरता है। कैलादेवी मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन महेश शर्मा ने बताया कि नवसंवत्सर पर माता के दर्शनों के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। शाम तक करीब साढ़े छह लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
बसों में रही भीड़
नवसंवत्सर पर माता के दर्शनों के बाद अब श्रद्धालुओं का अपने गंत्वय की ओर लौटना भी शुरू हो गया। दर्शनों के बाद यात्रियों की रवानगी होने से बसों में खूब भीड़ रही। दिनभर बसों में यात्री भार बना रहा। गौरतलब है कि अब मेले में चार-पांच दिन यात्रियों की कमी रहेगी, जबकि सप्तमीं-अष्टमी को एक बार भी माता के दरबार में भीड़ बढ़ेगी।
Published on:
07 Apr 2019 05:33 pm
