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चुनाव में वादे कर भूल जाते, जीतने के बाद देखने नहीं आते

चुनावी यात्रा - ग्राम पंचायत मुख्यालय ही विकास से वंचित
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hindaun karauli news

चुनाव में वादे कर भूल जाते, जीतने के बाद देखने नहीं आते

हिण्डौनसिटी. देश में आम चुनाव का होने को है। राजनीतिक पार्टियां फिर नए-पुराने वादों सेे वोट भुनाने को तैयार हैं। लोकसभा चुनाव में जनता कैसा प्रत्याशी चाहती है और क्या हैं विकास की उम्मीद, जरुरतें और मुद्दे। यह सब जानने के लिए राजस्थान पत्रिका की ओर से शुरू की गई करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र की चुनावी यात्रा मंंगलवार को भरतपुर जिले से सटे क्षेत्र के सीमांत गांव बाइजट्ट पहुंची। जहां पत्रिका की टीम ने ग्रामीणों से चुनावी मुद्दों पर चर्चा की। ग्रामीण ने किसान से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों पर बेवाक बात की। ग्रामीणों ने कहा कि गांव देश की इकाई है। पालना के लिए सियासत के संदेश जमीन तक आत हैं तो समस्याओं को पुकार भी सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे।


चौपाल की चर्चा में ये उठे मुद्दे-
भरतपुर जिले की सीमा से मात्र आठ किलोमीटर पहले स्थित करौली जिले का सीमांत गांव बाईजट्ट यूं तो ग्रामपंचायत मुख्यालय है, लेकिन हालात गांव-ढाणी जैसे हैं। वर्ष 1995 में ग्रामपंचायत विजयपुरा से अलग हो ग्रामपंचायत का दर्जा मिलने के ढाई दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं की टोटा बना है। करीब साढ़े तीन हजार की आबादी वाले गांव में सभी जातियों के लोग निवास करते हैं, लेकिन अनुसूचित जाति वर्ग की बाहुलता है।ग्रामीणों ने कहा कि उनके पास समस्याओं का अंबार है। चर्चा के दौरान ग्रामीणों ने कहा गांव को सूरौठ से जोडऩे वाली एक मात्र सड़क जर्जर हाल है। पांच किलोमीटर लम्बी सड़क पर दुपहिया वाहन से सफर तय करने में भी आधे घंटे से अधिक समय लगता है। बाईजट्ट को रीझवास, कलसाड़ा, विजयपुरा व अन्य गांवों से पगडंडीनुमा कच्चे रास्तों से जुड़ा है। गंाव में राजीव गांधी सेवा केन्द्र तक पहुंचने का रास्ता ही सुगम नहीं है। गांव में स्वास्थ्य सेवा के नाम पर एएनएम सेंटर (स्वास्थ्य उपकेंद्र) संचालित है।

रोगियों को उपचार और गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सूरौठ अथवा 20 किलोमीटर दूर हिण्डौन अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि जलयोजना नहीं होने से ग्रामीण नलकूपों पर आश्रित है। गरीब तबके के लोगों को दूसरों के नलकूपों से पानी ढोह कर लाना पड़ता है। गांव के रास्तों व चरागाह भूमि पर अतिक्रमण होने से राह संकरी हो गई हैं। वहीं गोचर क्षेत्र घट गया है।

गांव में पशु चिकित्सा के लिए उपकेंद्र स्वीकृत है, लेकिन भवन नहीं होने से पशुधन सहायक को इधर-उधर बैठ कर पशुओं का उपचार करना पड़ता है। दवाएं भी दूसरे के घर में रखनी पड़ती हैं। ग्रामीणों ने कहा कि कलसाड़ा-बाइजट्ट के महज 8 किलोमीटर लम्बी सड़क निर्माण होने की जरुरत है। सड़क बनने से लोग 20 किलोमीटर का फेरा बचा कर सीधे महवा पहुंच सकेंगे।
देश में लोकसभा चुनाव के लेकर चल रही सरगर्र्मियों की गरमाहट बाइजट्ट की फिजां में भी दिखी। भीमा पटेल से प्रधानमंत्री के पाकिस्तान के खिलाफ उठाए एयर स्ट्राइक के कदम की तारीफ की। नारायणलाल अध्यापक ने कि बीते पांच साल में देश में सुधार के कई काम हुए हैं। बदलाव के कुछ कष्ट भी सहना होता है। वहीं गोविंद व रामेश्वर प्रजापत ने जन प्रतिनिधियों के द्वारा गांवों के विकास की अनदेखी करने की बात कही।

ग्रामीण रामेश्वर, मोहन सिंह, रामनिवास ने कि चुनाव में किए वादे पूरे करने वाले जन प्रतिनिधि चाहिए। स्थिति यह है कि चुनाव प्रचार में विकास के बड़े वादे करने वाले चुनाव जीतने के बाद देखने नहीं आते हैं। पांच वर्ष बीतने के बाद भी चम्बल का पानी लाने की परियोजना स्वीकृति के लिए टेबलों पर ही धूम रही है। ग्रामीण सोहन सिंह ने बताया कि गांव में आंतरिक सड़कें तो बनी हैं, लेकिन जल निकासी का प्रबंध बेहतर नहीं हुआ है।

पगड़ंडी तो कहीं उधड़ी सड़क-
हिण्डौन से बाइजट्ट गांव पहुंचने 20 किलोमीटर के सफर में कई तरह के रास्तों से निकलना पड़ा। बयाना मार्ग पर सूरौठ तक 15 किलोमीटर की दूरी मोटरसाइकिल से फर्राटे से तय हो गई। सूरौठ कस्बे के भीड़ भरे बाजार को पास कर स्टेशन रोड पर चलते हुए दिल्ली-मुम्बई रेलवे लाइन के नीचे एकल आवागमन की संकरी पुलिया से निकले। खेतों के बीच 100 मीटर तक कच्चे रास्ते के निकल सड़क तक पहुुुंचे। वर्षों से पेंचवर्क नहीं होने से उधड़ी सड़क मानों कदम-कदम पर बने गड्ढ़ों में गुम होने को आतुर है।

गांव में पहुंचे तो मंदिर के पास बड़े छप्परपोश पास मोटरसाइकिल रोकी और हुक्का गुडग़ुड़ा रहे वृद्ध भीमा पटेल और नारायणलाल मास्टर से मेरी व सहयोगी साथी की राम-राम-सा हुई। पानी पीने के दौरान चुनावी बात छेड़ी तो आस-पास बैठे लोग जुुट गए। लोगों ने दर्द बयां किया कि उन्होंने वर्ष 2014 में लोकतंंत्र के महायज्ञ में सजगता से वोटों की आहूति दी, लेकिन वर्तमान सांसद चुनाव के समय के बाद एक दफा भी बाइजट्ट नहीं आए। इससे पहले के सांसद का भी कमोबेश यही हाल रहा। ग्रामीण सुुगरसिंह ने बताया कि सांसद आदर्श गांव योजना की तर्ज पर पूर्ववर्ती विधायक ने बाइजट्ट गांव को गोद लिया, लेकिन विधायक की गोद में रहने के बाद भी गांव विकास के दुलार से वंचित रह गया।

विधानसभा क्षेत्र की फैक्ट फाइल
विधानसभा -हिण्डौन
कुल मतदाता- 252743
पुरुष मतदाता -134391
महिला मतदाता-118352
(इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति व ओबीसी मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। )

चर्चा में छाए प्रमुख मुद्दे-
-समुचित चिकित्सा सेवा सुलभ हो।
-हिण्डौन के लिए सीधा सड़क निर्माण हो।
-कलसाड़ा के लिए सड़क निर्माण हो ताकि सीधे महवा पहुंचा जा सके।
- गांव में पेयजल समस्या के लिए जल योजना बने।
-रास्तों व चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाए जाएं।
-गांव की एक मात्र सम्पर्क सडक सूरौठ मार्ग का पुनर्निर्माण हो।