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सरकार चाहे तो राजस्थान में दुग्ध अन्नपूर्णा योजना से संवर जाएगा गौ-संरक्षण, बंद होंगी हानिकारक दवाएं व केमिकल्स; सुधरेगी बच्चों की सेहत

दवाओं और हानिकारक केमिकल्स के कारण शरीर में बनने वाले जहर एवं उसके असर को कम करने में गाय का दूध प्रभावकारी है। इसलिए ये किया जाए..
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करौली

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Vijay ram

Jul 11, 2018

जयपुर/करौली.
राजस्थान सरकार द्वारा स्कूलों में शुरू की गई दुग्ध अन्नपूर्णा योजना से बच्चों को तो फायदा मिल ही रहा है, लेकिन इसमें गायों के जरिए गांव-शहरों की तस्वीर भी बदली जा सकती है।

इस योजना से सरकार गौ संबद्र्धन की बढ़ावा मिला तो इससे न केवल सरकार की ओर से निर्धारित दर दूध मिल पाएगा बल्कि ये दूध बच्चों की सेहत के लिएपौष्टिक भी होगा। असल में इसके लिए स्कूल के संस्था प्रधान व मिड डे मील प्रभारी भी पहल करनी होगी।

गायों को मिल सकता है जीवनदान
राजस्थान पत्रिका ने इसे लेकर जब पशु विशेषज्ञों और राजनीतिज्ञों से बात की तो कई बातें सामने आईं। सबके विचार यही थे कि सरकार गायों की मदद ले। बता दें कि सरकार ने 2 जुलाई से अन्नपूर्णा दुग्ध योजना प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शुरू की है। इस से सम्बंधित दिशा निर्देशों में बच्चों को सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाया जाना है। इस आदेश के बाद स्कूलों के शिक्षक सहज सुलभ उपलब्ध भैंस के दूध को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि १४१४ स्कूलों में दूध का वितरण किया गया, जिनमें से शत- प्रतिशत में भैंस का दूध ही दिया गया। गांवों में भैंस का दूध नहीं मिला रहा है तो अध्यापक सरस डेयरी के दूध का इंतजाम कर रहे हैं। वे गाय के दूध के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे जबकि जानकारों का मानना है कि बच्चों की सेहत के लिएगाय का दूध सुपाच्य और पौष्टिक अधिक होता है। इसके अलावा विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र में ३५ रुपए प्रति लीटर तथा शहरी क्षेत्र में ४० रुपए की दर निर्धारित की है। इस दर से गाय का दूध आसानी से मिल सकता है। जबकि भैंस का दूध ४० से ५० रुपए की रेट में है।

दूध वितरण के ये हैं नियम
दुग्ध वितरण योजना के तहत स्कूलों में टोंड (बिना फेट का) का दूध दिया जाना है। दूध गांव की दुग्ध समिति, महिला स्वयं सहायता समूह, अन्य स्वयं से ले सकते हैं। इन समूहों से नहीं मिलने पर स्कूल प्रबंधन समिति अपने स्तर पर दूध खरीद सकती है। सप्ताह में तीन दिन दूध दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में मंगलवार, गुरुवार, शनिवार तथा शहरी क्षेत्र के सोमवार, बुधवार तथा शुक्रवार को दूध दिया जाना है।

गो-संबद्धर्न हो सकेगा
यादव वाटी गो-शाला के अध्यक्ष मुन्ना सिंह का कहना है कि सरकार इस योजना में पहल करके संस्था प्रधान व प्रभारी शिक्षकों को गाय के दूध को प्राथमिकता देने के आदेश जारी करे तो इससे गायों का पालन को बढ़ावा मिलेगा। अभी गाय के दूध का व्यवसायिक उपयोग नहीं होने से गांव तथा शहरों में गाय खत्म होती जा रही है। पशुपालकों भी गायों को पालने में रुचि नहीं दिखाते हैं।शहर में प्लास्टिक खाकर गाय दम तोड़ रही हैं। अगर गाय का दूध स्कूलों में सप्लाई होने लग जाए तो पशुपालक गायों के पालन करने को आगे आएंगे।

लाभदायक है गाय का दूध
करौली राजकीय आयुर्वेद अस्पताल अ श्रेणी के चिकित्सा अधिकारी-प्रभारी किशनगोपाल शर्मा भैंस के दूध की तुलना में गाय के दूध को लाभदायक बताते हैं। शर्मा के अनुसार गाय के दूध में फेट कम होता है। किसी बच्चे के बौद्धिक विकास के लिए गाय का दूध बेहद लाभदायक है। यह दूध पाचन के लिए बेहतरीन होता है और इसे पचाने में तंत्र को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।

दवाओं और हानिकारक केमिकल्स के कारण शरीर में बनने वाले जहर एवं उसके असर को कम करने में गाय का दूध प्रभावकारी है। इसमें विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसके प्रयोग से पुराना बुखार, मानसिक रोग, पेट के रोग, हृदय रोग में लाभ मिलता है। इसके विपरीत भैंस के दूध में फेट अधिक होने से शरीर में प्रमाद आता है। यह बुद्धि को मंद करने वाला साथ ही इससे कब्ज भी होती है।

किसी का भी खरीद सकते हैं
गाइड लाइन में गाय या भैंस का ही दूध खरीदने के बारे में कोई नियम नहीं है। जिस दूध में फेंट कम है, उसे स्कूलों में वितरण किया जाना है। यदि कोई शिक्षक गाय के दूध का वितरण करे तो कर सकता है। ताराचंद जाटव अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक व मिड डे मील योजना प्रभारी करौली

गाय -भैंस के दूध में तुलनात्मक एक कप के हिसाब से
कैलोरी फेट कोलोस्ट्रोल सोडियम पोटोशियम कार्वोहाइड्रेड प्रोटीन
गाय का दूध ४२ प्रतिशत १ ५एमजी १ ४ १ ८
भैंस का दूध ११५ २ ४६ १२७ ४३४ १३२ ८.५