5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पहले हुई बारिश के समय किसानों ने भूमि में नमी आने से बुवाई तो कर दी थी, लेकिन अब तेज धूप से नहीं रहे पानी मिलने के आसार

अब तेज धूप ने झुलसाया ऐसा कि किसानों की भी नहीं हो पा रही बुवाई..
2 min read
Google source verification

करौली

image

Vijay ram

Jul 27, 2018

पहले हुई बारिश के समय किसानों ने भूमि में नमी आने से बुवाई तो कर दी थी, लेकिन अब तेज धूप से नहीं रहे पानी मिलने के आसार

अच्छी बारिश के इंतजार में किसान, फिर रूठा मानसून

करौली.
मानसून की बेरुखी से गर्मी फिर लोगों को आहत करने लगी है। कुछ दिनों से पड रही तेज धूप ने फिर झुलसाना शुरू कर दिया है। पंखे-कूलर अपने पुराने ढर्रे गरम हवा फेंकने पर आ गए हैं। दिनभर तेज तपीश के बाद देर रात तक भी हालत ऐसी ही रहती है।

ऐसे में लोग ैचैन से सो भी नहीं पा रहे हैं। मई-जून जैसी गर्मी पडऩे लगी हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले छिटपुट बारिश हुई थी, जिसके बाद पड़ रही तेज धूप से उमस का असर भी है। बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए लोगों को निराश के सिवा कुछ हाथ नहीं लग रहा। मौसम विभाग की ओर से इस बार बेहतरीन बारिश की कि गई भविष्यवाणी अब तक के हालातों को देखकर सिफर साबित हो रही है। सामान्तया १५ जुलाई तक मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाता है। चहूं ओर झमाझम बारिश होने लगती है, लेकिन यहां अभी बारिश का ऐसा कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है।

खेत-खलिहान सूने, अन्नदाता चिंतित
मानसून की बेरुखी से इस समय खेल-खलिहान सून पड़े हैं। कुछ दिनों पहले हुई बारिश के दौरान भूमि में नमी आने से जल्दबाजी में किसानों बुवाई कर दी थी, लेकिन तेज धूप ने बीज को जला दिया है। वहीं जिन किसानों ने बुवाई नहीं की है वे बारिश के इंतजार में है। बुवाई का समय निकला जा रहा है, लेकिन बारिश नहीं हो रही। कृषि के जानकारों के अनुसार देरी से बुवाई हुई तो फसल विकसित भी देरी से होगी और इसका असर खेती की गुणवत्ता पर पड़ेगा। मानसून सक्रिय नहीं होने से अन्नदाता चिंतित है।

सूखे बांध, जलस्रोत
बारिश के अभाव में जिले में बांध तथा अन्य जलस्रोत सूखे पड़े हैं। बारिश नहीं हुई तो जलसंकट और गहराएगा। सामान्यता मानसून की अवधि १५ सितम्बर तक रहती है। ऐसे में ढाई माह शेष है।जिसमें से भी करीब दस दिन बीत चुके हैं। ऐसे में यदि अब सुचारु बारिश नहीं हुई तो जलस्रोतों का भरना मुश्किल हो जाएगा। जिससे रबी की फसल के लिए सिंचाई में मुश्किल हो जाएगी।