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ओवरब्रिज का मुद्दा चुनाव में ‘बायपास’

ओवरब्रिज का मुद्दा चुनाव में ‘बायपास’,तीन दशक में पूरा नहीं आरओबी निर्माण Overbridge issue: Overbridge issue 'Bypass' in election, not complete ROB in three decades
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hindaun karauli news

ओवरब्रिज का मुद्दा चुनाव में ‘बायपास’

हिण्डौनसिटी. मैं हिण्डौन में करौली-महवा बायपास पर बन रहा आरओबी हूं। वैसे तो तुझे तीन दशक पहले बन जाना चाहिए था। लेकिन मेरे निर्माण के लिए होते रहे नए-नए प्रयोग कार्य पूर्ण होने में रोडा बन गए। हालांकि प्रयोग कागजी न हो कर अमल में भी लाए गए, लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते आज भी शहर के लोग मेरी छाती से गुजरने का सपना संजोए हैं।

आधारशिला रखने से लेकर कई दफा लोकसभा व विधानसभा के चुनाव हुए। लेकिन मैं कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बन सका। जी, हां करीब तीन दशक पहले करौली-महवा बायपास के लिए भूमि अधिग्रहण होने के बाद से ही लोग टू लेन आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) के निर्माण पूरा होने की बाट देख रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार करीब 30 वर्ष पहले शहर में यातायात के अधिक दबाव को देखते हुए सरकार ने करोड़ों रुपए का मुआवजा दे जमीन का अधिग्रहण किया था।सार्वजनिक निर्माण विभाग ने बायपास का निर्माण पर भी करोडों रुपए खर्च किए थे। लेकिन ओवरब्रिज के अभाव में बायपास अनुपयोगी बना हुआ है।


जनवरी 2017 में होना था कार्य पूरा-
सूत्रों के अनुसार सरकार ने वर्ष2015 में करौली-महवा बायपास पर आरओबी निर्माण के लिए 31 करोड़ 15 लाख रुपए स्वीकृत किए थे। इसके बाद कार्यकारी एजेंसी राजस्थान स्टेट रोड डवलपमेन्ट्स कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) द्वारा दिल्ली की पीआरएल कंपनी को निविदा जारी की गई। जुलाई 2015 में आरओबी का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया। निर्माण कार्य जनवरी 2017 में पूरा होना था। लेकिन करीब चार वर्ष बीतने के बाद भी आरओबी निर्माण अधर में अटका है।
पीआरएल का टेंडर होगा निरस्त, फिर से होगी निविदा-
आरएसआरडीसी के अभियंताओं के अनुसार बायपास पर 10 मीटर चौड़ाई और 800 मीटर लंबाई के आरओबी के निर्माण के लिए अब नए सिरे से निविदा जारी की जाएगी। सूत्रों की मानें तो रेलवे सीमा में काम करने के लिए समय पर अनुमति नहीं मिलने के कारण संवेदक पीआरएल कंपनी को घाटा झेलना पड़ रहा था। ऐसे में संवेदक ने काम पूरा करने के लिए असहमति जताते हुए निविदा सरेंडर कर दी है। स्थानीय अभियंताओं ने पूरे मामले को आरएसआरडीसी अध्यक्ष वीनू गुप्ता तक पहुंचा दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद पीआरएल कंपनी की निविदा निरस्त कर फिर से निविदा जारी की जाएगी।

65 फीसदी निर्माण,12.65 करोड़ का भुगतान-
जानकारी के अनुसार आरओबी का करीब 65से 67 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जिसके एवज में संवेदक को 12 करोड़ 65 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका हे। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर रेम्प का कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन रेलवे सीमा में फाउंडेशन के लिए पाइल व गर्डर डालने का कार्य अटका हुआ है। ओवरब्रिज बनने के बाद करोड़ों की लागत के बायपास का उपयोग हो सकेगा। महवा मार्ग के 220 केवी बिजली स्टेशन से, मंडी यार्ड के सामने होकर मंडावरा मार्ग, झारेड़ा मार्ग, सिकरौदा मार्ग होते हुए राजकीय कॉलेज के पीछे से करौली मार्ग तक जाने वाले बायपास मार्ग से शहरी क्षेत्र को भारी वाहनों एवं शहर में नहीं रुकने वाले यात्री वाहनों से निजात मिल सकेगी।

संवेदक पर लगेगा 10 प्रतिशत जुर्माना-
सूत्रों के अनुसार रेलवे क्षेत्र में काम करने की अनुमति नहीं मिलने, रेलवे के जबलपुर जोन मुख्यालय में ड्राइंग फेल होने पर फिर से डिजाइन तैयार करने, फाउंडेशन के लिए बनाई जाने वाली पाइल का नमूना फेल होने के कारण आरओबी निर्माण में देरी हुई। अब आरएसआरडीसी द्वारा संवेदक की 10 प्रतिशत राशि जुर्माना के रूप में काटी जाएगी।


चुनाव बाद छह माह में बन जाएगा आरओबी-
चुनाव के बाद छह महिने में बायपास पर आरओबी निर्माण पूरा करा दिया जाएगा। इससे पहले पीआरएल कंपनी का टेंडर निरस्त कर फिर से निविदा जारी की जाएगी।-
बीडी इंदौरा, अधिशासी अभियंता, आरएसआरडीसी।

किसानों को होती परेशानी-
बायपास पर आरओबी निर्माण नहीं होने से कृषि उपज मंडी में जिंस लेकर आने वाले किसानों को शहर से निकलना पड़ता है। जिससे मंडी पहुंचने में देर लगती है।-
विशम्भर बंडीभोला, संयुक्त सचिव, राजस्थान खाद्य व्यापार संघ।

जल्द पूरा कराएंगे निर्माण-
बायपास पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य पूरा कराना प्राथमिकताओं में शुमार है। दशकों से लंबित निर्माण की बाधा के बारे में उच्च स्तर पर जानकारी की जाएगी। आरओबी को जल्द पूरा कर जनता को राहत दी जाएगी।
-भरोसीलाल जाटव, विधायक, हिण्डौन।

भाजपा सरकार ने शुरू कराया काम
वर्षों से बंद पड़े आरओबी निर्माण कार्य को भाजपा सरकार ने शुरू कराया था। यह जनहित का मुद्दे प्रारंभ से ही प्राथमिकता पर रहे हैं।
-हेमेंद्र वशिष्ठ, जिलाध्यक्ष, भाजपा, करौली