
राजस्थान की इस रेल परियोजना को लेकर गर्मा रही सियासत, हर चुनाव में दिखाते हैं रेल के सब्जबाग
दिनेश शर्मा
करौली. हैरिटेज के नाम पर सियासत में उलझकर बे-पटरी हुई गंगापुर-धौलपुर वाया करौली रेल लाइन का मामला लोकसभा चुनाव में एक बार फिर गर्माया है। यूं तो आजादी के बाद से हर चुनाव में रेल का मुद्दा उठता रहा है और उम्मीदवारों की ओर से यहां के लोगों को रेल के सब्जबाग भी दिखाए जाते रहे हैं। इस बार इस मुद्दे को सियासत की कुछ अधिक ही हवा लगी हुई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक इस मामले में बोलकर गए हैं तो अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 3 मई को हो रही सभा में उनकी ओर से इस मामले में कुछ आश्वासन मिलने की लोग उम्मीद कर रहे हैं।
करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि पड़ोस के संसदीय क्षेत्रों की भी यह महत्वपूर्ण मांग है। इससे एक नया रेलवे ट्रेक तैयार हो सकेगा। रेलवे के लिए फायदे की यह परियोजना फिलहाल राजनीति के गलियारों में भटक रही है। हालांकि कांग्रेस हो चाहे भाजपा इस अहम मुद्दे पर आम लोगों की नाराजगी को भांप चुनाव में अपने हित साधने के जतन कर रही हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश की सत्ता में काबिज होने के बाद दो-तीन बार इसका जिक्र कर चुके हैं। वहीं दो दिन पहले धौलपुर के सैंपऊ में हुई सभा में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस परियोजना का जिक्र किया था और इस बंद परियोजना फिर से शुरू कराने की बात कही थी। इस मामले में कांग्रेस की ओर से भाजपा पर लगातार हमले करने के बाद उम्मीद की जा रही है कि 3 मई को हिण्डौनसिटी आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर क्षेत्र वासियों को कुछ शुभ संकेत दे सकते हैं।
दूसरी ओर सांसद मनोज राजोरिया कहते हैं कि कांग्रेस ने वाहवाही बटोरने के लिए बिना भूमि के प्रबंध किए ही रेल परियोजना का शिलान्यास कर दिया।
वे स्वयं के द्वारा इस मामले में किए गए विभिन्न प्रयासों की भी जानकारी देते हैं। खैर फिलहाल जो भी हो सवाल यही है कि क्या लोकसभा चुनाव के बाद यह रेल परियोजना वापस पटरी पर चढ़ पाएगी।
लम्बे इंतजार के बाद हुई स्वीकृत, अभी अटकी
दशकों की मांग के बाद धौलपुर-गंगापुरसिटी वाया करौली रेल लाइन वर्ष 2010-2011 में स्वीकृत हुई थी। इससे इलाके के बाशिंदों को रेल का सपना पूरा होने की उम्मीद जगी। वर्ष 2012-13 में परियोजना के सर्वे का काम हुआ। साथ ही वर्ष 2013 में सरमथुरा में तत्कालीन केन्द्रीय रेल राज्यमंत्री ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था। इसके बाद कार्य भी शुरू हुआ, लेकिन फिर कार्य बंद कर दिया गया। परियोजना में लगभग 70 करोड़ रुपए खर्च भी हो चुके हैं। दो वर्ष से काम थमा हुआ है।
145 किलोमीटर की है परियोजना
उत्तर मध्य रेलवे जोन इलाहाबाद के अधीन इस परियोजना में धौलपुर से सरमथुरा तक आमान परिवर्तन होना है, जबकि सरमथुरा से गंगापुरसिटी तक नई रेल लाइन डलनी है।
परियोजना के पूरी होने से तीसरा वैकल्पिक रेल मार्ग पूर्ण होने पर पश्चिम राजस्थान का मुख्य केन्द्र जयपुर तथा जोधपुर तीनों ग्रांड ट्रंक मार्गों से जुड़ जाएगा। लेकिन यह अभी लोगों के लिए सपना ही बना हुआ है। इस परियोजना से गंगापुर के साथ, करौली, धौलपुर एवं दौसा जिले के लोगों को लाभ मिलेगा। क्योंकि दौसा-गंगापुरसिटी रेल परियोजना का कार्य से चल रहा है, जिसके इस वर्ष के अन्तिम माह तक पूर्ण होने की उम्मीद है।
पीएमओ बता रहा 'फ्रीजÓ
धौलपुर-सरमथुरा रेलवे लाइन आमान-परिवर्तन तथा गंगापुरसिटी तक विस्तार करने के प्रमुख प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दिए गए आरटीआई के जवाब में इसे 'फ्रीजÓ करना बताया है। यह जवाब रेल विकास समिति करौली की ओर से मांगी गई आरटीआई में दिया गया। इससे धौलपुर-करौली के लोगों का इस रेल परियोजना का सपना अभी अधूरा है।
होता क्षेत्र का विकास
दशकों तक चली मांग के बाद रेल परियोजना स्वीकृत हुई थी। इसका शिलान्यास होकर काम शुरू हो गया। रेल दौडऩे से क्षेत्र का विकास होता, लेकिन हैरिटेज के नाम पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और सांसद मनोज राजोरिया ने पत्र भेज काम को रुकवा दिया। हम इसे शुरू कराने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। हिण्डौन आ रहे प्रधानमंत्री जी को भी इस मामले में अवगत कराने के लिए समय उपलब्ध कराने को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के जरिए पत्र भेजा है।
वेणुगोपाल शर्मा, महासचिव, रेल विकास समिति, करौली
स्वार्थ की खातिर बंद कराई
भाजपा ने स्वार्थों की खातिर रेल लाइन कार्य बंद करा दिया, जो गलत है। केन्द्र में हमारी सरकार बनती है तो निश्चित रूप से रेल लाइन कार्य शुरू कराया जाएगा। सरकार भी नहीं आएगी तो इस कार्य को पुन: शुरू कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे। रेलवे लाइन को चालू कराने को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत भी कह चुके हैं।
ओमप्रकाश मामू, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
रेल लाइन को पूरी कराकर रहेंगे
करौली को रेल लाइन से जोडऩा मेरा सपना है। करौली को रेल से जोडऩे के मैने भरसक प्रयास किए है और रेल लाइन के कार्य को पूरा कराकर रहेंगे। कांग्र्रेस ने 2013 में आनन-फानन में शिलालेख लगा दिया। बाद में मैने जानकारी की तो पता चला कि तकनीकी खामियां हैं। भूमि तक के प्रबंध नहीं किए गए थे। हमने इस मामले में ठोस कार्रवाई की है। इसके परिणाम जल्द आएंगे।
डॉ. मनोज राजोरिया, प्रत्याशी, भाजपा, करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र
Updated on:
02 May 2019 08:37 pm
Published on:
02 May 2019 08:37 pm
