
भुखमरी से जूझ रहे ग्रामीण ने की खुदकुशी, प्रशासन ने बाद में किया खाने का इंतजाम
कासगंज। आर्थिक तंगी से जूझ रहे 35 वर्षीय ग्रामीण युवक ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। जहां एक ओर देश प्रदेश की सरकारें गरीब निराश्रितों बेसहाराओं के कल्याण के लिए अनेकों जनकल्याणकारी योजनाए संचालित कर रही हैं, वहीं यूपी के जनपद कासगंज में इन योजनाओं का लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है। इसीके चलते भुखमरी से जूझ रहे ग्रामीण को मौत को गले लगाना पड़ा।
पूरन सिंह कासगंज जनपद के ढोलना थाना क्षेत्र के कस्बा बिलराम का रहने वाला था। गर्मी हो या बारिश खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने वाले पूरन सिंह तीन बेटी, एक बेटा और पत्नी सुनीता के साथ गुजर बसर कर रहा था। बताया जा रहा है कि पूरन सिंह ने अपने हिस्सा का मकान भी अपनी मां रामकली और छोटे भाई राजू के इलाज में बेच कर पैसा लगा दिया, लेकिन पूरन सिंह अपनी मां और भाई को नहीं बचा सका। बाद में पूरन सिंह बेघर हो गया। उसके बड़े भाई ने खाली पड़ा प्लॉट दे दिया। जिसमें वह बच्चों को लेकर गुजर बसर कर रहा था।
इंतहा तो तब हो गई, जब उसके परिवार के पास खाने पीने के भी लाले पड़ गए। हालांकि पूरन सिंह पत्नी की बाली बेचकर रोजगार की तलाश में दिल्ली गया था, परंतु किस्मत के बदनसीब पूरन सिंह को वहां भी रोजगार नहीं मिला। जहां आकर उसने नीम के पेड़ पर जाकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पूरन सिंह की खुदकुशी की सूचना पर परिवार में ही नहीं बल्कि उसकी आर्थिक तंगी को लेकर कस्बे में कोहराम मच गया। हर कोई नम आंखो से पूरन सिंह की मौत के बाद उसके परिवार के लिए आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है।
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ग्रामीणों की मानें तो पूरन सिंह के घर पर दो दिनों से चूल्हा भी नहीं जला, पूरन सिंह अपनी भूख प्यास से कराहते बच्चों को देख नहीं सका और उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। भुखमरी से हुई मौत के बाद जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। ढोलना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने जिला प्रशासन का बचाव करते हुए पूरे प्रकरण को एक सामान्य घटना करार दिया और मौत का कारण पैर फिसलना बताया गया। उधर भुखमरी से हुई मौत के बाद नायब तहसीलदार कीर्ति चौधरी भी पहुंच गई और उन्होंने मौत के बाद उसके परिवार के लिए खाने पीने का बंदोबस्त करने की बात कही।
Published on:
31 Aug 2019 05:15 pm
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