1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मिलावट से विलुप्त हो रही धान की उन्नत किस्म, किसानों ने बताया बड़ा कारण

-मिलावट से विलुप्त हो रही धान की उन्नत प्रजाति-किसानों ने बताया इस विलुप्ति का कारण-कभी धान की ये प्रजाति बढ़ाती थी प्रदेश की शान-अब मिलावट से विलुप्त होती जा रही क्षत्री धान

2 min read
Google source verification
News

मिलावट से विलुप्त हो रही धान की उन्नत किस्म, किसानों ने बताया बड़ा कारण

कटनी. धान की उन्नत किस्मों में से एक क्षत्री की प्रजाति अब जिले में विलुप्तता की कगार पर पहुंच गई है। खाने में उमदा स्वाद के कारण कभी क्षत्री की डिमांड देश के बड़े शहरों तक थी, तो इसकी खेती भी सिर्फ कटनी में होने के साथ ही धान की यह प्रजाति प्रदेश की शान हुआ करती थी। धान की इस उन्नत प्रजाति की विलुप्तता के कगार पर पहुंचने की कहानी भी हैरान कर देने वाली है। बता दें कि, जिले के 50 से ज्यादा गांव में इसकी खेती होती थी, लेकिन अब सिर्फ दो से तीन गांवों के चुनिंदा किसान ही क्षत्री बीज को विलुप्त होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

क्षत्री धान की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि, धान की दूसरी वेरायटी की तुलना में क्षत्री का उत्पादन कम होने कीमत ज्यादा रखनी पड़ती है। दूसरी ओर बीते कुछ वर्षों के दौरान बाजार में क्षत्री के नाम पर दूसरे चावल में मिलावट करते हुए एसेंस डालकर कम दाम में बेचा गया। मिलावट के कारण कीमत भी कम रखी गई। इसका असर यह हुआ कि, जो किसान ईमानदारी से क्षत्री धान की खेती करते थे, उन्हे नुकसान हुआ और किसान हाइब्रिड धान की खेती करने लगे।


कम ही बचा है धान का बीज

बीते एक दशक से ज्यादा समय से यह सिलसिला चल रहा है। अब क्षत्री धान का बीज भी कम ही बचा है। इस धान की प्रजाति को बचाने के लिए अब कृषि विभाग ने किसानों को खेती करने के लिए प्रेरित करने का बीड़ा उठाया है। समिति बनाई जा रही है। उचित कीमत दिलाने की बात कही जा रही है।


क्या कहते हैं किसान ?

जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर केवलारी गांव के किसान राजपाल पटेल बताते हैं कि पहले 4 एकड़ में क्षत्री की खेती करते थे, धीरे-धीरे रकबा घटता गया। इस साल 40 डिसमिल में ही क्षेत्री की खेती है। गांव में सिर्फ हमारे घर पर ही थोड़ी बीज बची है। जिससे आधा से एक एकड़ में बोवनी की जा सकती है। इसी गांव के किसान गोविंद पटेल का कहना है कि आठ साल हो गए हमने क्षत्री की खेती छोड़ दी है। बाजार में क्षत्री के नाम पर जमकर मिलावट किया गया और कम दाम में बेचा गया। हम अपना धान लेकर जाते तो जाहिर है एक या दो दाना दूसरे धान का मिल ही जाता है, जिसे यह कहकर लौटा दिया जाता कि शुद्ध नहीं है। परेशान होकर क्षत्री के स्थान पर सरकारी धान की खेती करने लगे।

यह भी पढ़ें- रेल गाड़ी के इंजन में लगी आग, पायलेट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, आग लगने ये वजह आई सामने


क्षत्री धान - लागत, उत्पादन और कीमत

- 100 रुपए प्रतिकिलो लगभग खर्च होता एक किलो क्षत्री चावल में, थोड़ी भी लाभ लें तो कीमत और ज्यादा।

(जैसा कि केवलारी गांव में क्षत्री की खेती करने वाले किसान राजपाल व गोविंद पटेल ने बताया)