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कटनी. पिछले पांच सालों में महंगाइ सुरसा की तरह बढ़ी हैं। पांच साल से लेकर अबतक गेहूं लगभग १५ रुपए था वह २० से २५ बिक रहा है, चावल २२ से ३०-३५ रुपए हो गया है। तेल ५० रुपए मिलता था अब ८० पार हो गया। ४०० रुपए की रसोइ गैस ७०० की हो गइ। किराया हर साल १० प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। कुल मिलाकर लगभग ५४ प्रतिशत महंगाई बढ़ी है, लेकिन भारत सरकार की हर हाथ को काम , जितना काम उतना दाम के नारे के साथ २००७ में शुरू की गइ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मजदूरी करने वाले मजदूरों के दिन नहीं फिरे हैं। पत्रिका ने पिछले पांच साल में दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम में हुई बढ़ोत्तरी का मूल्यांकन किया तो यह अंतर निकलकर आया। पिछले पांच साल में मात्र १० रुपए मजदूरी बढ़ी है। जो महंगाइ की अपेक्षा मात्र ५ फीसदी है। २०१४ में १६६ रुपए के आसपास मजदूरी मिलती थी जो अब बढ़कर मात्र १७४ रुपए पर पहुंची है। हैरानी की बात तो यह है कि मनरेगा में दिनभर तेज धूप, ठंड और बारिश के सीजन में खून-पसीना एक करने वाले मजदूरों की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है। इतना ही नहीं जिले में विभाग पर्याप्त मानव दिवस भी मजदूरों को नहीं उपलब्ध करा पा रहा। योजना के २०१७-१८ वित्तीय वर्ष में ३२ लाख ५६ हजार को काम देना था, इसमें से ५४ हजार लोग मानव दिवस से वंचित रह गए हैं।
पांच साल में मात्र १० रुपए
जिले में मनरेगा के तहत खून-पसीना बहाने वाले मजदूरी की मजदूरी में बढ़ोत्तरी न के बराबर हुइ है। जिला पंचायत व मनरेगा कार्य से जुड़े अधिकारियों की मानें तो पांच साल में मात्र २ रुपए प्रतिवर्ष के मान से मात्र १० रुपए की बढ़ोत्तरी हुइ है। इससे इंदाजा लगाया जा सकता है कि जब सरकार की मजदूरों व श्रमिकों के प्रति गंभीर नहीं है तो फिर निजी सेक्टर में मजदूरों का क्या हाल होगा।
कलेक्टर रेट के बराबर भी नहीं मजदूरी
मनरेगा में मजदूरों को कलेक्टर रेट के मान से भी नहीं मिल रही है। जिले में कलेक्टर रेट पर अकुशल श्रमिकों की मजदूरी ७२ रुपए है। इसी प्रकार अर्धकुशल श्रमिक की मजदूरी ३१० रुपए, कुशल श्रमिकों की ३६० रुपए और उच्च कुशल श्रमिक की मजदूरी ४१० रुपए तय की गइ है। यह मजदूरी हर ६ माह में रिवाइज होती है, लेकिन मनरेगा में सिर्फ साल में ही बढ़ती है वह भी न के बराबर।
यह है मनरेगा मजदूरी का सालवार आंकड़ा
(मजदूरी रुपए में)
वर्ष मजदूरी बढ़ोत्तरी
२०१८ १७४ ०२
२०१७ १७२ ०२
२०१६ १७० ०२
२०१५ १६८ ०२
२०१४ १६६ ०२
मनरेगा को लेकर खास-खास
- २०१८-१९ में जिलेभर में १ लाख ९७ हजार हैं जॉब कार्डधारी।
- १२० करोड़ रुपए की लागत से होंगे विकास कार्य व मानवदिवस।
- १ अप्रैल से जिले में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी हुइ १७४ रुपए।
- २०१७-१८ में ३२ लाख ५६ हजार में से ३२ लाख को ही मिला काम।
- २०१८-१९ में ४० लाख मजदूरों को काम देने का लक्ष्य निर्धारित।
इनका कहना है
मनरेगा में मजदूरी का निर्धारण शासन स्तर पर होता है। साल में दो रुपए की बढ़ोत्तरी होती है। तय गाइड लाइन के अनुसार राशि का भुगतान राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में काम करने वाले मजदूरों के खाते में पहुंचाइ जाती है।
संतोष बाल्मीक, मनरेगा परियोजना अधिकारी।
Published on:
01 May 2018 11:05 am
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