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900 मीटर लंबे महानदी पुल पुल के डेक स्लैब और कैंटिलीवर हिस्से में गंभीर क्रैक, चार से मैहर-अमरकंटक मार्ग बंद

10 नंबर के पिलर में कंपन, 30 किलोमीटर का लगाना पड़ रहा लोगों को चक्कर, तीन साल से आश्वासन मिले लेकिन समाधान नहीं तीन राज्यों व कई जिलों सहित बरही क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों का आवागमन है बाधित, जनप्रतिनिधी व अफसर नहीं हैं गंभीर

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कटनी

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Balmeek Pandey

Feb 25, 2026

Maihar Amarkantak road closed for four years

Maihar Amarkantak road closed for four years

बालमीक पांडेय @ कटनी. जबलपुर-भोपाल नेशनल हाइवे एनएच-45 पर शहपुरा-भिटौनी में बनाए गए गए ब्रिज का हिस्सा धंसा गया है। 391 करोड़ की बड़ी परियोजना में जहां भ्रष्टाचार खुलकर सामने आया तो वहीं कटनी जिले में बरही क्षेत्र में बरही-मैहर मार्ग पर स्थित कुटेश्वर महानदी पुल हादसों के लिए मुंह बाये खड़ा है। लगभग चार साल पहले पुल में तकनीकी खराब घोषित होने के बाद आवागमन बंद है, लेकिन अबतक पुल को ठीक नहीं कराया गया जिससे कई जिलों व राज्यों के लोगों का आवागमन ठप है। हैरानी की बात तो यह है कि मार्ग बंद होने के बाद भी लोग जान जोखिम में डालकर जीवन-यापन करने विवश हैं। मरम्मत व निर्माण के लिए दो साल से घोषणाएं व पत्राचार हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी होता नहीं दिख रहा।
विकास के बड़े-बड़े दावों और घोषणाओं के बीच बरही-मैहर मार्ग पर स्थित कुटेश्वर महानदी पुल आज भी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है। वर्ष 2022 में जर्जर घोषित कर बंद किया गया यह पुल चार साल बीतने के बाद भी चालू नहीं हो सका है। न पुल की मरम्मत पूरी हुई, न वैकल्पिक बाईपास बना। नतीजतन किसान, स्कूली बच्चे, मरीज, व्यापारी और पर्यटक रोजाना परेशानी झेलने को मजबूर हैं।

कई राज्यों पर जिलों के लोग परेशान

यह पुल खजुराहो-अमरकंटक राजमार्ग (राज्य मार्ग-11) पर स्थित है, जो मध्यप्रदेश को उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जोडऩे वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, खजुराहो, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान और अमरकंटक जाने वाले हजारों श्रद्धालु व पर्यटक प्रतिदिन आवागमन करते थे। जानकारी के अनुसार करीब 900 मीटर लंबा यह पुल बाणसागर परियोजना के अंतर्गत जल संसाधन विभाग की तकनीकी देखरेख में बनाया गया था। बाद में इसका संधारण कार्य लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया गया। पुल का निर्माण भारी वाहनों के दबाव और बैकवॉटर क्षेत्र की जटिल संरचना को ध्यान में रखकर किया गया था।

यह आई है पुल में खराबी

वर्ष 2022 में पुल के डेक स्लैब और कैंटिलीवर हिस्से में गंभीर दरार (क्रैक) और झुकाव (डिफ्लेक्शन) पाया गया। पिलर क्रमांक 10 के पास अधिक कंपन की स्थिति सामने आई, जिससे बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई। विशेषज्ञ जांच के बाद प्रशासन ने एहतियातन पुल को भारी वाहनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया। बाद में छोटे वाहनों की भी आवाजाही रोक दी गई।

तीन साल से प्रक्रियाओं का दौर

तीन वर्षों में पुल सुधार को लेकर कई बार टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तकनीकी जटिलता के कारण ठेकेदार कार्य लेने से पीछे हटते रहे। सेतु निर्माण निगम के अंतर्गत भी प्रयास असफल रहे। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन तो दिए, लेकिन जमीनी अमल नहीं हो सका।

दर्जनों गांव प्रभावित

पुल बंद होने से बरही क्षेत्र के कुटेश्वर, इटौरा, घुरहर, हरदुआ महानदी, धनवाही, मझगवा, आमातारा, धरी सहित दर्जनों गांवों का जनजीवन प्रभावित है। ग्रामीणों को बरही अस्पताल, बाजार और शासकीय कार्यालयों तक पहुंचने के लिए 30 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है। बरही नगर का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्रामीण खरीदारी के लिए मजबूरन मैहर का रुख कर रहे हैं। वहीं स्कूली बच्चों को रोजाना लंबा और जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है। किसान समय पर मंडी और बाजार नहीं पहुंच पा रहे, जिससे कृषि व्यापार पर असर पड़ा है।

26 करोड़ की लागत से होना था पुल का सुधार

चित्रकूट से अमरकंटक पहुंच मार्ग पर स्थित कुटेश्वर महानदी पुल के सुधार का रास्ता साफ तो हो गया था। प्रदेश सरकार के निर्देशन में इस क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत के लिए लगभग 26 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। यह कार्य मध्यप्रदेश वाटर रिसोर्सेज डिपार्टमेंट की बाणसागर परियोजना इकाई के माध्यम से कराया जाना था। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने दिसम्बर माह में क्षेत्रीय विधायक संजय पाठक को पत्र लिखकर इसकी जानकारी भी दी थी, पुल की जटिल तकनीकी संरचना के कारण पूर्व में मरम्मत की प्रक्रिया अटक रही थी और टेंडर सफल नहीं हो पा रहे। अब निर्माण एजेंसी बदले जाने से स्थायी सुधार संभव हो सकेगा। बजट में भी इस शामिल किया गया है, लेकिन अबतक समाधान सामने नहीं आया।

वर्जन

एमपीआरडीसी की टीम ने निरीक्षण किया है। चीफ इंजीनियर को रिपोर्ट भेजी है। अब इसमें टीम यह देखेगी कि मरम्मत संभव है या नया बनाना पड़ेगा। शीघ्र पुल का काम हो और आवागमन शुरू हो यह पहल की जाएगी।

आशीष तिवारी, कलेक्टर।