
Employees will be out of job in nagar niagam katni
कटनी. नगर सुधार न्यास की योजनाओं के लिए अधिग्रहित जमीनों की खरीद-फरोख्त की जांच शुरू होने के बाद हडक़ंप मच गया है। योजना क्रमांक 14 की जमीन की खरीद-फरोख्त में नगरनिगम के अफसरों पर भी जांच की आंच आ रही है। इस जमीन को बेचे जाने की शिकायत दो वर्ष पूर्व होने के बाद भी नगरनिगम के अधिकारियों ने जांच के नाम पर लीपापोती कर दी और जांच पूरी नहीं की। पत्रिका के खुलासे के बाद अब नगरनिगम आयुक्त शिशिर गेमावत ने नगरनिगम के उपयंत्री शैलेन्द्र प्यासी, सहायक ग्रेड-2 विजय शर्मा व लिपिक चंद्रशेखर सौंधिया को मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इधर, शनिवार को एकबार फिर माधवनगर निवासी प्रकाश कुमार द्वारा नगरनिगम आयुक्त व कलेेक्टर से इस प्रकरण में शिकायत कर जमीन का विक्रय करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई है।
जानकारी के अनुसार योजना क्रमांक 14 के अंतर्गत कलेक्ट्रेट के समीप आयकर कार्यालय के पास की जमीन बेची गई है। यहां दिनेश कुमार डोडानी की खसरा नंबर 328 में 0.35 हेक्टेयर निजी जमीन थी। इसमें से दिनेश ने संदीप कुमार केवलानी को 0.35 हेक्टेयर में से 0.25 हेक्टेयर बेची थी। इसके बाद दिनेश ने निजी जमीन बताकर सडक़ के दूसरी तरफ स्थित नगर सुधार न्यास की 0.10हे. जमीन अजय मिश्रा को बेच दी। प्रकरण की शिकायत दो वर्ष पूर्व ही नगरनिगम के अधिकारियों के पास पहुंची थी लेकिन अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और कार्रवाई की बजाय जांच दबाकर बैठ गए, जिसके बाद एकबार फिर इस प्रकरण में जांच खड़ी हो गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने जमीनों का सीमांकन करने लिखा पत्र
नगर निगम की स्वामित्व की योजनाओं की जमीनों का सीमांकन कर संरक्षित करने के लिए नगर निगम नेता प्रतिपक्ष रागिनी मनोज गुप्ता ने आयुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में बताया है कि नगर निगम स्वामित्व की योजनाओं की जमीन पर भू माफिया द्वारा लगातार कब्जा किया जा रहा है। नगर निगम के उदासीन रवैया के चलते नगर निगम की बेशकीमती जमीन पर भू माफिया की नजर लगी हुई है। यदि नगर निगम के स्वामित्व की समस्त भूमियों का सीमांकन करवाकर और उसे संरक्षित करने हेतु तार बाउंड्री इत्यादि कराकर स्थानीय पार्षद और संबंधित राजस्व निरीक्षक को जानकारी दी जाती है तो नगर निगम की विभिन्न स्थानों पर स्थित भूमियों पर हो रहे कब्जे पर रोक लगाई जा सकती है।
बिक गई योजना क्रमांक 15 की जमीन
जानकारी के अनुसार नगरनिगम द्वारा योजना क्रमांक 15 के अंतर्गत अमकुही में करीब 15 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। भूस्वामियों को यहां आंशिक रूप से मुआवजा का वितरण भी कर दिया, लेकिन यह जमीन नगरनिगम के नाम पर दर्ज नहीं हो सकी। नायब तहसीलदार व एसडीएम न्यायालय से नामातंरण खारिज होने के बाद नगरनिगम ने कमिश्नर न्यायालय में अपील की। कमिश्नर न्यायालय से दोबारा प्रकरण एसडीएम को रिमांड कर गुण-दोष के आधार पर निराकरण करने कहा। एसडीएम न्यायालय से 2022 में पुन: नामांतरण खारिज होने के बाद अफसरों ने चुप्पी साध ली। नगरनिगम के अफसरों ने न तो पुन: कमिश्नर न्यायालय में अपील की और न ही सिविल न्यायालय में ुगुहार लगाई। बताया जा रहा है कि वर्तमान में पूरी जमीन का विक्रय भूस्वामियों द्वारा कर दिया गया है। जबकि नगरनिगम द्वारा अबतक योजना को निरस्त भी नहीं किया गया है।
इनका कहना है
योजना क्रमांक 14 की जमीन विक्रय की जांच कराई जा रही है। यह सामने आया है कि प्रकरण में पूर्व में भी शिकायत हो चुकी है लेकिन संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा जांच करते हुए नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई है। नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
शिशिर गेमावत, प्रभारी आयुक्त, नगरनिगम
Published on:
15 Sept 2024 07:33 pm

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