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वरिष्ठ लेखक ने कहा: देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में हर व्यक्ति की होनी चाहिए अहम भूमिका

नोयडा से कटनी पहुंचे वरिष्ठ लेखक ने पत्रिका से चर्चा में कहा कि ईमानदार लेखनी समाज को दिशा देती है, युवाओं को उद्यमिता की ओर बढऩा होगा

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कटनी

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Balmeek Pandey

Dec 28, 2025

Writer avdhesh kumar noida

Writer avdhesh kumar noida

कटनी. जब देश में किसी भी क्षेत्र में ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाता है, तो समाज को उससे दिशा और प्रेरणा मिलती है। जीवन में अच्छे कार्यों के माध्यम से समाज की समस्याओं पर लेखनी द्वारा फोकस कर समाधान की पहल जरूरी है। यही कारण है कि आज देशभर में सुधार, चेतना और जागरूकता की बात की जा रही है। यह विचार नोएडा से कटनी पहुंचे वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार ने पत्रिका से विशेष बातचीत में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कटनी जिला अपने इतिहास, सभ्यता, संस्कृति, जलवायु, जनजातीय जीवनशैली और राजनीतिक दृष्टि से देश में विशेष महत्व रखता है। कटनी का पुस्तक मेला अद्भुत आयोजन है, जहां पुस्तकों की विविध श्रेणियां, विभिन्न भाषाओं की गोष्ठियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विचार-विमर्श इसे विशिष्ट बनाते हैं। देशभर से लोग यहां पहुंच रहे हैं, जिससे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का वातावरण निर्मित हो रहा है।

डिजिटल युग में पुस्तकों से कैसे जुड़ें युवा?

लेखक ने कहा कि डिजिटल युग में जानकारी मोबाइल पर आसानी से उपलब्ध होने के कारण पुस्तकों से दूरी बढऩे की बात सामने आती है, लेकिन अवधेश कुमार का मानना है कि पुस्तकों के प्रति रुचि समाप्त नहीं हुई है। आवश्यकता आधारित पुस्तकें आज भी प्रासंगिक हैं। जैसे व्यापार को आगे बढ़ाने वाली कुंजीदार रचनाएं, इतिहास, उद्यमिता, धर्म, अध्यात्म, तकनीकी, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी पुस्तकें। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के डिजिटल संस्करण, संक्षिप्त और सारगर्भित पुस्तिकाएं तैयार की जानी चाहिए, जिससे डिजिटल युवा भी पुस्तक संस्कृति से जुड़ सके।

युवाओं में कैसे बढ़े पढऩे की चेतना?

वरिष्ठ लेखक ने कहा कि युवाओं में पढऩे और बहस करने की अभिरुचि बढ़ी है। देश-दुनिया, राजनीति, प्रशासनिक विषयों पर युवा गंभीर चर्चा कर रहे हैं। युवाओं के भाव, विचार और चेतना को पुस्तकों के माध्यम से सामने लाना होगा। पुराने साहित्य, उपन्यास और रचनाएं आज भी प्रेरणादायी हैं। युवाओं में पढऩे की रुचि जगाने के लिए सतत अभियान चलाने की आवश्यकता है।

युवाओं के हाथ को काम कैसे मिले?

बेरोजगारी को गंभीर विषय बताते हुए अवधेश कुमार ने कहा कि डिग्री का सीधा संबंध रोजगार से हो सकता है, लेकिन ज्ञान और कौशल उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। आज जीविकोपार्जन के अनेक आयाम हैं। स्टार्टअप, उद्यमिता, कृषि, पर्यटन, स्वास्थ्य, लेखन, संस्कृति और ऑर्गेनिक खेती जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज देश में 1.80 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जिनमें से 100 से ज्यादा एक अरब डॉलर से अधिक की पूंजी जुटा चुके हैं। युवाओं को उद्यमी बनना होगा और अपने क्षेत्र में कुशलता हासिल करनी होगी।

दुनिया में युवाओं की क्या है जिम्मेदारी?

उन्होंने कहा कि भारत लंबी गुलामी के बाद अब जागृत हुआ है। दुनिया भारत की ओर देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका होगी। युवाओं और बुजुर्गों को अपने चरित्र, संस्कृति और राष्ट्रभाव को मजबूत करना होगा। स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्वों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा राष्ट्र बनाना है जो न केवल आर्थिक और सैन्य शक्ति में, बल्कि सभ्यता और संस्कृति में भी दुनिया को मार्गदर्शन दे। वरिष्ठ लेखक अवधेश कुमार ने कहा कि दुनिया में अवसरों की कमी नहीं है, आवश्यकता है योग्यता, पहचान और सही समय पर निर्णय लेने की। भारत के नवजवान आज नई राह दिखा रहे हैं और यही देश की सबसे बड़ी ताकत है।