
Young farmer earning profits from mushroom cultivation
बालमीक पांडेय @ कटनी. भारी-भरकम लागत लगाने के बाद खेती में प्राकृतिक आपदा व सरकारों की नीतियों से हो रहे नुकसान के कारण एक ओर जहां किसान खेती से मुंह मोड़ रहे हैं तो वहीं युवा अब बिजनेस के साथ खेती में भी हाथ आजमा रहे हैं। (Mushroom cultivation) खेती को अब एक बड़े व्यापार के तौर पर देख रहे हैं और उसमें सफल भी हो रहे हैं। कटनी के युवा बेहतर कमाई के लिए मशरूम की खेती को एक अच्छा विकल्प मान रहे हैं। (button mushroom) यह उन खेती में से एक है जिसके लिए लंबे-चौड़े खेतों की नहीं बल्कि एक कमरा ही काफी है। मशरूम की खेती में होने वाले फायदे को देखकर इन दिनों इसकी खेती में शहरी युवा भी खासी दिलचस्पी ले रहे हैं। आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही मशरूम उगाने के एक खास तरीके के बारे में जिनमें जलवायु की भ्रांति को मात देते हुए कटनी शहर के नई बस्ती निवासी युवा किसान गौतम कोटवानी के बारे में। स्नातक की पढ़ाई कर दवा के बेहतर कारोबार के बीच युवा किसान खेती में कुछ अलग करने की ठानी और अब तीन सालों से लाखों रुपये का मुनाफा भी कमा रहे हैं। खास बात यह है कि बगैर मिट्टी याने कि कोल्ड स्टोरेज बनाकर बटन मशरूम की खेती कर अपनी आय को बढ़ा रहे हैं। मशरूम की खेती कर गौतम कोडवानी न सिर्फ रुपये कमा रहे हैं बल्कि नाम कमाने के साथ खेती में मिसाल बन रहे हैं। इस खेती में चाचा लक्ष्मण पृथ्यानी की भी मदद ले रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बाजार में मशरूम की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन उस हिसाब से अभी इसका उत्पादन नहीं हो रहा है, ऐसे में किसान मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
शादी समारोह ने बना दिया किसान
27 वर्षीय युवा किसान गौतम ने बताया कि दो साल पहले रिश्तेदारी में शादी समारोह में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ शहर गए थे। वहां पर देखा कि मशरूम की खेती बड़े अच्छे ढंग से हो रही है। उन्होंने वहीं से ठाना कि जब ये खेती कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं। वापस लौटते ही खेती करने का विचार आया और काम शुरू कर दिया। 10 हजार फीट में तैयार किया प्लांट तैयार किया और अब बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
दो एकड़ में लगाया है प्लांट
किसान गौतम कोडवानी ने बताया कि दो एकड़ में मशरूम के लिए प्लांट लगाया है। इसमें लगभग 65 लाख रुपये की लागत लगाई है। उद्यानिकी और कृषि विभाग सहित तकनीकी अधिकारियों की मदद से प्लांट तैयार किया है। मशरूम की पैदावार 45 दिन में हो रही है। एक फसल में किसान को ढाई लाख रुपये की आमदनी हो रही है। खास बात यह है कि तापमान सही मिले और रखरखाव ठीक ढंग से हो जाए आमदनी कई गुना बढ़ जाती है। इसमें सफाई का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। 14 से 15 डिग्री तापमान के बीच मशरूम तैयार किया जा रहा है। किसान पांच रूम में अच्छा खासा उत्पादन ले रहे हैं। अलग-अलग दिनों में रूमों से मशरूम की पैदावार हो रही है। चार टन मशरूम का उत्पादन एक रूम में हो रहा है।
चार राज्यों में सप्लाई
कटनी का बना मशरूम न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि तीन अन्य राज्यों में भी हो रहा है। उत्पादन के बाद 120 रुपये थोक में बटन मशरूम को किसान बेच रहे हैं। किसान के मुताबिक उत्तराखंड के हरिद्वार, छत्तीसगढ़ के पुरी, उत्तरप्रदेश के वाराणसी में सप्लाई हो रही है। यभी आसपास के शहरों में की कर रहे हैं, जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा वैसे-वैसे सप्लाई बढ़ाते जाएंगे।
खास-खास:
- किसान ने तैयार किए हैं पांच ब्लॉक, तीन और रूम कर रहे तैयार।
- गेहूं के भूंसे से तैयार करते हैं खाद, उसमें मिलाते हैं मुर्गे की खाद व यूरिया।
- मशरूम के एक गमले में डाले जा रहे 50 ग्राम बीज, 100 रुपये है भाव।
- एक रूम 1250 फीट का खास तरीके से किया है तैयार।
- एसी रूम तैयार करने में 15 लाख रुपये की आ रही लागत।
- बटन मशरूम उगाने का सही समय सितंबर-अक्टूबर से मार्च महीना होता है।
बिजली सबसे बड़ी चुनौती
लक्ष्मण पृथ्यानी ने बताया कि बिजली की कटौती और पर्याप्त मात्रा में मिजली न मिलना सबसे बड़ी चुनौती है। बिजली न होने के कारण जनरेटर चलाना पड़ता है। इसमें 5 से 7 प्रतिशत आमदनी डीजल में खर्चनी पड़ रही है। यदि किसानों को पर्याप्त मात्रा में बिजली मिलने लग जाए तो फिर भारत को एक फिर सोने की चिडिय़ा बनने से कोई नहीं रोक सकता। किसान ने कहा कि बमुश्किल 6 से 8 घंटे ही बिजली मिल रही है। यदि जनरेटर का उपयोग न किया तो मशरूम के जलने का खतरा बना रहता है। किसान ने कहा कि मासूम बच्चे की तरह मशरूम को पाला जाता है।
कमाल के हैं औषधीय गुण
चिकित्सक डॉ. यशवंत वर्मा के अनुसार मशरूम एक अच्छे किस्म का खाद्य पदार्थ है। यह एक अच्छी औषधी भी है। इसके सेवन से अनेक बीमारियां स्वत: ठीक हो जाती हैं। इसमें एंटीबायोटिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की जीवाणुओं से रक्षा करते हैं। एंटीवायरल तत्व शरीर को वायरल बुखार से बचाते हैं। खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढऩे नहीं देते। इसके सेवन से हृदय रोग से रक्षा होती है। इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है जो रक्ताल्पता के शिकार व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं के लिये बहुत लाभकारी है। इसके सेवन से कब्ज दूर होती है, पेट साफ होता है और खुलकर भूख लगती है। यह प्रोटीन और विटामिन बी-12 का एक अच्छा स्रोत है। मात्र तीन ग्राम मशरूम के सेवन से एक व्यक्ति की विटामिन बी-12 की दैनिक आवश्यकता पूरी होती है। इस प्रकार मशरूम स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत गुणकारी खाद्य पदार्थ है।
बटन मशरूम की खेती
बटन मशरूम निम्न तापमान वाले क्षेत्रों में अधिक उगाया जाता है, लेकिन शहर के युवा किसान ने कमाल कर दिखाया है। शहर के एक मात्र किसान ने यह कर दिखाया है कि तकनीक द्वारा यह हर जगह उगाया जा सकता है। बस मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा और संसाधन होना चाहिए। लाखों रुपये कमाने का सपना रखने वाले लोगों के लिए मशरूम की खेती आज के समय में फायदे का सौदा साबित हो सकती है। बता दें कि लोगों को बटन मशरूम काफी पसंद आते हैं। आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन है।
ऐसे तैयार होता है कम्पोस्ट
बटन मशरूम की खेती एक विशेष प्रकार की खाद पर ही की जाती है, जिसे कम्पोस्ट कहते हैं। गेहूं का भूसा 1000 किलोग्राम, अमोनियम सल्फेट, केल्शिम अमोनियम नाईट्रेट, सुपरफौसफेट, यूरिया, मुर्गे की खाद से तैयार होता है। कम्पोस्ट तैयार करने में करीब 28 दिन का समय लगता है। भूसे को 2 दिन तक पानी डाल कर गीला किया जाता है।
तीन तरह के मशरूम की कर सकते हैं खेती
1. बटन मशरूम
2. ऑयस्टर मशरूम
3. दूधिया मशरूम
इनका कहना है
कटनी विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिंघनपुरी में किसान लक्ष्मण पृथ्यानी अपने भतीजे गौतम कोडवानी के साथ मिलकर बनट मशरूम की खेती कर रहे हैं। इसमें बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। जिले के किसान अब उन्नतत तकनीकी की खेती में हाथ आजमाकर मिसाल बन रहे हैं।
वीरेंद्र सिंह, जिला उद्यानिकी अधिकारी।
Published on:
30 Sept 2019 11:46 am
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