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CG Crime News: तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर तेंदुए का शिकार! 2 खाल, हड्डियां-नाखून बरामद… 5 आरोपी भी गिरफ्तार

Crime News: वन्यजीव अपराध के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए कवर्धा वनमंडल ने तेंदुए की खाल के अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया है।

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5 आरोपी गिरफ्तार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

5 आरोपी गिरफ्तार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG Crime News: वन्यजीव अपराध के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए कवर्धा वनमंडल ने तेंदुए की खाल के अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया है। संयुक्त टीम की सुनियोजित छापेमारी में दो नग तेंदुआ खाल, हड्डियां और नाखून बरामद किए गए हैं जबकि इस गंभीर मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह पूरी कार्रवाई वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो भोपाल और राज्य स्तरीय उडऩदस्ता दल रायपुर से प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिलते ही कवर्धा वनमंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम गठित की गई, जिसने योजनाबद्ध तरीके से तरेगांव क्षेत्र के ग्राम गुडली और कवर्धा परिक्षेत्र के ग्राम चोरभट्टी में दबिश दी।

वनमंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि 20 मार्च 2026 को कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से प्रतिबंधित वन्यजीव अवशेष बरामद किए गए, जिनमें तेंदुए की खाल के अलावा हड्डियां और नाखून भी शामिल हैं। बरामद सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि मामला सिर्फ संग्रहण तक सीमित नहीं, बल्कि अवैध उपयोग और संभावित तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है।

तांत्रिक गतिविधियों में उपयोग का खुलासा

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि तेंदुए की खाल का उपयोग तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता था। यह खुलासा न केवल अवैध वन्यजीव शिकार के पीछे की मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि समाज में फैली अंधविश्वास की प्रवृत्ति को भी सामने लाता है। वन विभाग अब इस एंगल से भी जांच को आगे बढ़ा रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों में संतराम धुर्वे ग्राम चोरभट्टी, सुखराम मेरावी ग्राम गुडली, अघनू धुर्वे ग्राम आमानारा, सहैततर मरकाम ग्राम सिंघारी और कनस टेकाम ग्राम बेन्दा शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं और लंबे समय से इस अवैध गतिविधि में संलिप्त हो सकते हैं। विभाग अब इनके संपर्कों और संभावित नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रहा है।

कड़े कानून के तहत की गई कार्रवाई

इस प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39, 44, 50, 51 एवं 52 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं गिरफ्तार आरोपियों को 21 मार्च 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया है। वन विभाग अब पूछताछ के जरिए इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।