
सेजाडीह में पहली पक्की सड़क,(photo Patrika)
CG News: कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में बसे ग्राम सेजाडीह की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजार रहे इस पहाड़ी गांव तक अब पहली बार पक्की सड़क पहुंची है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत निर्मित इस सड़क ने न सिर्फ गांव की तस्वीर बदली है, बल्कि यहां के लोगों के जीवन को भी नई दिशा दी है।
योजना के अंतर्गत पीएमजीएसवाई विभाग द्वारा सेंदूरखार से सेजाडीह तक 2.10 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है। इस परियोजना पर 1 करोड़ 56 लाख 88 हजार रुपए की लागत आई है। सड़क बनने का सबसे बड़ा असर गांव की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखने लगा है। अब सेजाडीह में हर मंगलवार को साप्ताहिक बाजार लगना शुरू हो गया है।
सेजाडीह गांव विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय का निवास क्षेत्र है। सेजाडीह ग्राम पंचायत अमनिया का आश्रित गांव है। गांव तक पहुंचने के लिए केवल संकरे और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते ही सहारा थे, जिन पर पैदल चलना भी चुनौतीपूर्ण था। गांव में पहली से पांचवी तक के लिए स्कूल है। सबसे पास उपस्वास्थ्य केंद्र पुटपुटा और पोलमी करीब 10 किमी दूर है, जिसके कारण जब कोई बीमार होता या फिर गर्भवती महिला को घाट से पहाड़ी होकर नीचे उतारना पड़ता था। क्योंकि वहां तक वाहन नहीं पहुंच पाते थे। बारिश के दिनों में गांव लगभग पूरी तरह कट जाता था।
ग्राम निवासी धनसिंह धुर्वे बताते हैं कि पहले पंडरिया और कुई बाजार तक जाकर जरूरी सामान लाना पड़ता था। अब वाहन सीधे गांव तक पहुंच रहे हैं, जिससे राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।
12 अबूझमाड़ गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन
नक्सल मुक्त हो चुके बस्तर को बदलने का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है। संभाग के सभी जिलों में अब प्रभावित रहे इलाकों के विकास की शुरुआत हो रही है। ऐसे गांव जहां ग्रामीण वंचित और पीडि़त ही रहे वहां अब कलेक्टर-एसपी चौपाल रहे हैं। बस्तर जिले में भी ऐसे कई गांव हैं जो सालों तक नक्सलवाद का दंश झेलते रहे, ऐसे गांवों में लगातार बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा अपनी टीम के साथ पहुंच रहे हैं। पढ़े पूरी खबर
बंदूक की जगह अब विकास की आवाज
बस्तर का वह सुदूर वनांचल, जहां कभी सन्नाटा और दहशत का पहरा था, आज वहां खुशहाली की नई इबारत लिखी जा रही है। बस्तर जिले के दरभा विकासखंड का कोलेंग क्षेत्र, जो दशकों तक माओवादी गतिविधियों के कारण विकास की दौड़ में पिछड़ गया था, अब अपनी एक नई पहचान गढ़ रहा है। पढ़े पूरी खबर
Published on:
17 Apr 2026 07:27 pm
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