
Kawardha Municipal Council: कवर्धा नगर पालिका परिषद की राजनीति में एक बार फिर नया मोड आ चुका है। भाजपा के मनोनित अध्यक्ष के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर उच्च न्यायालय ने एक सप्ताह में चुनाव प्रक्रिया शुरु कराने के आदेश दिए हैं। ऐसे में संभव है कि फिर से अध्यक्ष पद के लिए उठा पटक हो जाए। नगर पालिका अध्यक्ष ऋषि शर्मा ने विधानसभा चुनाव के बाद 11 दिसंबर 2023 को अपना इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए गहमा गहमी शुरू हो गयी। क्योंकि राज्य में भाजपा की सरकार बैठ चुकी थी।
इस बीच नगर पालिका परिषद कवर्धा में कांग्रेसी पार्षद के बहुमत होने के बाद भी भाजपा के पार्षद मनहरण कौशिक को 11 मार्च 2024 को नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया। इस पर आपत्ति करते हुए कांग्रेस पार्षद मोहित माहेश्वरी ने न्यायालय की शरण ली। याचिका दायर की थी यह मनोनयन संविधान के विपरीत है।
पूरे मामले को याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीसी 1516-2024 पर उच्च न्यायालय ने शासन द्वारा अध्यक्ष मनोनयन की प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए शासन को एक सप्ताह के भीतर चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए आदेश जारी किया है। आदेश आने के बाद समस्त कांग्रेसी पार्षद ने बुधवार को राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की कॉपी सहित 15 पार्षदों के हस्ताक्षर के साथ चुनाव के संबंध में आवेदन निर्वाचन आयोग कों सौंपा ताकि जल्द से जल्द चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ किया जा सके।
याचिकाकर्ता के अनुसार न्यायालय ने यह निर्णय लेने के पश्चात कहा गया कि चुनाव तत्काल कराया जाए और सभी तथ्यों के आधार पर निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह सात दिनों के भीतर आवश्यक अधिसूचना जारी करके प्रक्रिया आरंभ करे। सभी अधोहस्ताक्षरी पार्षद द्वारा मांग किया गया कि चुनाव तत्काल कराया जाए। संविधान की भावना की रक्षा की जाए और कानून का शासन सुरक्षित रहे।
याचिकाकर्ता मोहित माहेश्वरी ने बताया कि न्यायालय ने कहा है कि नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर चुनाव छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 37 के अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं हो रहा था। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने यह भी कहा कि चुनाव हुए काफ ी समय बीत चुका है जिसके फ लस्वरूप राज्य द्वारा मनोनीत अध्यक्ष ने नगर पालिका परिषद कवर्धा के कार्यालय पर कब्जा कर लिया जो संविधान के विरुद्ध है। निर्वाचन अधिसूचना जारी करने में किसी भी प्रकार का विलम्ब पारित आदेश की जानबूझकर अवहेलना होगी और यह नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष पद पर आसीन होने के संवैधानिक आदेश को जानबूझकर दरकिनार करने का कृत्य भी होगा।
कवर्धा नगर पालिका अंतर्गत कांग्रेसी पार्षदों ने कहा कि निर्वाचन अधिसूचना जारी करने में किसी भी प्रकार का विलम्ब न्यायालय द्वारा पारित आदेश की जानबूझकर अवहेलना होगी। यह नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष पद पर आसीन होने के संवैधानिक आदेश को जानबूझकर दरकिनार करने का कृत्य भी होगा। चुनाव हुए काफी समय बीत चुका है जिसके फलस्वरूप राज्य द्वारा मनोनीत पार्षद ने नगर पालिका परिषद कवर्धा के कार्यालय पर कब्जा कर लिया है जो संविधान के विरुद्ध है। कृपया उक्त रिट में न्यायालय द्वारा पारित आदेश का प्रभावी पालन सुनिश्चित करें।
27 वार्डों वाले कवर्धा नगर पालिका में 21 पार्षद कांग्रेस के साथ हैं, हालांकि अब तक दो कांग्रेसियों ने पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं छह पार्षद ही भाजपा के है। वहीं विधानसभा चुनाव के तीन माह बाद भी कांग्रेस को पालिका अध्यक्ष बनाने का अवसर नहीं मिला। जबकि दूसरी ओर भाजपा ने अपना दांव खेल दिया और कांग्रेसी पार्षद मनहरण कौशिक को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिए। इसे लेकर कांग्रेसियों में काफी नाराजगी रही। इसके चलते ही वह कोर्ट पहुंचे।
Updated on:
05 Jul 2024 08:01 am
Published on:
04 Jul 2024 03:09 pm
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