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आपका बच्चा जिस बस से स्कूल जाता है कहीं वो भी तो अनफिट नहीं, कार्रवाई के नाम पर हो रही खानापूर्ति

206 स्कूल बसों में से 78 को मिला फिटनेस सर्टिफिकेट...शहर की सड़कों पर दौड़ रहीं 128 अनफिट स्कूल बसें...

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खंडवा. जिस स्कूल बस में बैठकर आपका बच्चा रोजाना स्कूल जा रहा है कहीं वो अनफिट तो नहीं। ये सवाल इसलिए क्योंकि शिक्षा सत्र शुरू हुए 30 दिन हो गए हैं, लेकिन स्कूली बच्चों की सुरक्षा के प्रति खंडवा में न तो परिवहन विभाग और न ही स्कूल प्रशासन गंभीर नजर आ रहा है। अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल संचालक उदासीनता बरत रहे हैं। अनफिट स्कूली वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में बच्चे जान जोखिम में लेकर सफर कर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर संबंधित विभाग की तरफ से खानापूर्ति कर दी जा रही है।

कहीं आपके बच्चे की स्कूल बस अनफिट तो नहीं ?
विभागीय आंकड़ों के अनुसार 128 अनफिट स्कूल वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। जिले में निजी स्कूलों में लगभग 206 स्कूल बसें पंजीकृत है जिसमें से केवल 78 स्कूल बसों ने ही फिटनेस प्रमाण-पत्र लिया है। जबकि करीब एक माह से स्कूल बसों से बच्चों को लाने ले जाने का कार्य किया जा रहा है। इसके प्रति स्कूल प्रशासन से लेकर, अभिभावक सहित संबंधित विभागीय अधिकारी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। स्कूली बसों में फर्स्ट एड बाक्स, पीने के पानी, आदि की सुविधाएं भी जरूरी हैं, जिसका कत्तई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। परिवहन विभाग की मानें तो स्कूल बसों तथा वाहनों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स होने पर ही फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है।

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स्टाफ वाहन से लाए जा रहे बच्चे
स्कूल वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस न होने की स्थिति में सबसे पहले स्कूल प्रबंधक की जिम्मेदारी तय की गई है। विभागीय अभिलेखों में 230 स्कूल बसें तथा 150 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। जबकि स्टाफ वाहनों पर ही बच्चों को ढोया जा रहा है। स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही मान्य हैं, बावजूद इसके टेंपो, मैजिक वैन और तमाम छोटे बड़े वाहन स्कूल वैन के नाम पर लगाए गए हैं। बसों में स्कूल का नाम, फोन नंबर आदि लिखे बिना ही कई स्कूली बसें चल रही हैं।

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ये बोले जिम्मेदार
78 स्कूल बसें फिटनेस सर्टिफिकेट ले चुकी हैं। 128 बसें रोड पर चलने लायक नहीं है। यदि बिना फिटनेस के चलती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चुनाव की वजह से इस ओर ध्यान नहीं दे सके हैं। अब जल्द इस पर कार्रवाई की जाएगी।
जगदीश बिल्लौरे, एआरटीओ खंडवा

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