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अजब-गजब…यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के लिए ड्रोन की मदद से देखी ऊंचाई

तीन स्थानों पर लगाएंगे डिवाइस, ड्रोन से देखी ऊंचाई।

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खंडवा

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Amit Jaiswal

Aug 21, 2018

cctv camera and drone news of slater house khandwa

cctv camera and drone news of slater house khandwa

खंडवा. शहर के इमलीपुरा स्थित स्लाटर हाउस में कैमरे लगाए जाने से पहले इंटरनेट का नेटवर्क तलाशना टेड़ी खीर बन गया है। सोमवार को यहां नगर निगम, पुलिसकर्मी व विशेषज्ञ ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी। ड्रोन की मदद से सिग्नल मिलने की संभावनाओं वाली ऊंचाई देखी। अब नेटवर्क मिलने के लिए यहां करीब 25 फीट ऊंचाई का एक खंभा लगाएंगे।
संभवत: दो दिन में ये काम होगा। इसके साथ ही तीन मेगा पिक्सल के सात नाइट विजन आईपी कैमरे लगाए जाएंगे। डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) लगाने का काम भी होगा। खास बात ये है कि सिग्नल कमजोर मिलने की वजह से अब तीन स्थानों पर डिवाइस लगाएंगे। स्लाटर हाउस से सीधे कंट्रोल रूम में कनेक्टिविटी नहीं होगी, बल्कि वाया बड़ाबम कंट्रोल रूम से सिग्नल दिए जाएंगे। निगम से विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग के भूपेंद्र सिंह बिसेन, सहायक इ-गवर्नेंस अधिकारी अंकितसिंह पंवार व अन्य पहुंचे थे।

पानी से बचाने के लिए शेड लगाया
निगम द्वारा स्लाटर हाउस में जहां मीटर लगाया जाना है, वहां शेड लगवाया है। अब इंटरनेट नेटवर्क मिल सके, सिग्नल कैच कर ले, इसके लिए एक खंभा लगाएंगे।

एचडी नहीं बल्कि नाइट विजन कैमरे
नगर निगम द्वारा सरकार की ओर से अधिकृत जेम पोर्टल से कैमरों की खरीदी की गई है। कुल 7 कैमरे स्लाटर हाउस में लगाए जाना है, जो कि नाइट विजन आईपी कैमरे हैं। जबकि शहर में पुलिस द्वारा लगाए गए कैमरे एचडी हैं। निगम के जिम्मेदारों का कहना है कि जो कैमरे लगना है, वो 3 मेगा पिक्सल के हैं, इसमें चेहरा स्पष्ट आएगा।

इस तरह समझिए मामला
- 5 व 8 अगस्त को पुलिस ने कार्रवाई कर इमलीपुरा स्लाटर हाउस व आसपास के क्षेत्र में कार्रवाई की थी।
- यहां से खालें व मांस मिलने के बाद दो दर्जन से ज्यादा कब्जे चिह्नित कर सीसीटीवी लगाने के निर्देश दिए थे।
- 7 नाइट विजन कैमरे निगम द्वारा लगाए जाने की तैयारी, 1 लाख रुपए करीब खर्च संभावित।
- स्लाटर हाउस में इंटरनेट का पाइंट देंगे, वहां से कैमरों की कनेक्टिविटी सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ दी जाएगी।
- कैमरे इस तरह लगेंगे कि स्लाटर हाउस की तीन गली, बाहर की गली में होने वाली गतिविधि कवर होगी। केबलिंग का काम पूरा होने के बावजूद कैमरे इसलिए नहीं लग पाए हैं क्योंकि इस क्षेत्र में इंटरनेट नेटवर्क नहीं मिल पा रहा है। एेसे में इसकी मॉनिटरिंग सीधे कंट्रोल रूम में होना मुश्किल है और इन परिस्थितियों में कैमरे लग जाने का फायदा शरारती तत्व उठा सकते हैं।