
Flooding in river, flooding of houses causes millions of losses
खंडवा. पुल बहा, सड़कें फटी, मकान ढहे, गलियां कीचड़ से सनी, खेतों में गृहस्थी का सामान, घरों में गंदगी, दरकती दीवारें, भींगा अनाज व कपड़े और रहने, खाने, पहनने के लाले...यह तबाही का मंजर मुख्यालय से 40 किमी दूर स्थित ग्राम आशापुर का है। दरअसल, दो दिन लगातार हुई भारी बारिश से आशापुर से गुजरी अग्नि नदी में सोमवार को बाढ़ आई। इसके बाद अग्नि ने ऐसा तांड़व मचाया कि ग्राम के 40 से अधिक मकान व दुकानों को तबाह कर दिया। कई लोगों की गृहस्थी उजड़ गई तो कुछ ही दुकानें बह गई। बारिश थमते ही नदी में पानी कम हुआ तो ग्राम में चारों तरफ तबाही का मंजर नजर आया। जिसे देख प्रभावितों की आंखों से आंसुओं की बारिश शुरू हो गई। मंगलवार को लोग बाढ़ में बहा सामान खेतों में खोजते रहे। कुछ सामान मिला भी। ग्राम में बाढ़ की तबाही की खबर लगते ही जिलेभर से मददगार पहुंचे और लोगों को कपड़ा, दवा, खाने आदि की व्यवस्था कराई। वहीं प्रशासन ने नुकसान का सर्वे कराया।
गुप अंधेरे में खौफ में गुजरी रात
अग्नि नदी के कहर से ग्राम के बिजली पोल बह गए। लाइन क्षतिग्रस्त हुई। इससे बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप रही। इस कारण सोमवार की रात लोगों की खौफ के साये में गुप अंधेरे के बीच गुजरी। घरों में भरा पानी और कीचड़। इसके साथ जलीय जीव-जंतु भी घरों तक पहुंच गए। कुछ लोग भींगे कपड़ों के साथ रात गुजारी तो कुछ ने आसपास के घरों में सहारा लिया। सुबह होते ही पूरा गांव कीचड़ में सना हुआ नजर आया। चलने के लिए भी लोगों को रास्ता नहीं मिला। हालांकि बूंदाबांदी के बीच प्रशासन ने ग्राम में सफाई शुरू कराई। वहीं बिजली कंपनी ने बिजली लाइन को दुरुस्त करने का कार्य शुरू किया। ग्राम में पिछले करीब 36 घंटों से बिजली बंद है।
जान बचाई, लेकिन नहीं बचा पाए गृहस्थी
प्रभावित टेकराम बताते है कि सुबह से ही मूसलाधार बारिश हो रही थी। नदी में पुल पर तक पानी पहुंचा। लोग नदी की उफान देखने पहुंचे। देखते ही देखते पानी घरों तक पहुंच गया। अचानक जलस्तर बढऩे से घरों में कमर तक पानी भर गया। खतरा देख तुरंत परिवार के साथ छत पर पहुंचकर जान बचाई। लेकिन गृहस्थी नहीं बचा पाया। आंखों के सामने पूरा सामान बह गया। अनाज, कपड़े और अन्य सामान बर्बाद हो गया। बाढ़ में हर तरफ हाहाकार मची हुई थी। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर मदद ले रहे थे। भगवान का शुक्र है कि किसी को कुछ हुआ नहीं। अब प्रशासन नुकसान की भरपाई कर दे तो जीवन दोबारा पटरी पर लौट आए। क्योंकि जीवन भर की पूंजी पानी में बह गई। इनके अलावा चंद्रकुमार गोहर, दिलीप जैन, अंकुर चौहान, ऋतुराज राठौर, मुकेश राठौर, अशोक कृपाराम, मनोज विधानी, सोनू साहू सहित आधा सैकड़ा लोगों के घर व दुकानों में बर्बादी हुई है।
Published on:
31 Jul 2019 07:05 am
