6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अब खंडवा से इंदौर और ओंकारेश्वर का सफर होगा आसान

15 अगस्त से इंदौर तक चलेगी इंटरसिटी बस
2 min read
Google source verification
Intercity bus khandwa

Intercity bus khandwa

खंडवा. सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज (सूत्र सेवा) में एक क्लस्टर के लिए आए टेंडर की दर पर राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (एसएलटीसी) ने भोपाल में मंगलवार को भोपाल में मुहर लगा दी। अब आगे की प्रक्रिया ठीक रही तो 15 अगस्त से शहर में २ इंट्रा सिटी बस, इंदौर तक 4 स्टैंडर्ड एसी बस और ओंकारेश्वर तक 4 मिडी बसें चलेंगी।
प्रक्रिया के तहत भोपाल में हुई बैठक के मिनिट्स निगम के पास आएंगे, फिर यहां से संबंधित बस ऑपरेटर को अनुबंध के लिए लैटर जारी होगा। संबंधित को कंपनी गठित करना होगी। शासन द्वारा ऑपरेटर को 1 करोड़ 6 लाख 56 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा।
इधर, निगम को शहर में अतिरिक्त पाइपलाइन डालने के लिए टेंडर प्रक्रिया फिर से करना पड़ेगी, क्योंकि पहली बार में आए एकमात्र टेंडर की अधिक दर के प्रस्ताव पर ना कर दी गई है। बैठक में महापौर सुभाष कोठारी, आयुक्त जेजे जोशी और कार्यपालन यंत्री ईश्वरसिंह चंदेली शामिल हुए।


इस क्लस्टर को हरी झंडी...
इंट्रा सिटी: चीराखदान से नागचून (व्हाया माता चौक, इंदिरा चौक, बस स्टैंड, केवलराम चौक, घंटाघर, शिवाजी चौक) तक ६ किमी दूरी में 2 बसें चलेंगी।
इंटर सिटी: खंडवा से इंदौर तक १३० किमी दूरी में 4 (स्टैंडर्ड एसी बस), खंडवा से ओंकारेश्वर तक 4 मिडी बसें चलेंगी।


तीन के स्थान पर चार क्लस्टर का सहारा
सूत्र सेवा में पिछडऩे की स्थिति में निगम ने ट्रांसपोटर्स की मांग पर तीन के स्थान पर चार क्लस्टर किए। इनमें कुल 44 बसें चलाई जाना प्रस्तावित है। क्लस्टर-1 में 10, 2 में 11, 3 में 11 और क्लस्टर-4 में 12 बसें चलाई जाना है। निगम स्थानीय स्तर पर तीसरी बार का टेंडर है। इससे पहले शासन स्तर से भी तीन बार निविदाएं जारी कर प्रयास किए गए थे लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी।


अतिरिक्त पाइपलाइन का एेसा है प्रस्ताव
10 करोड़ रुपए से शहर में करीब 50 किमी अतिरिक्त पाइपलाइन डाली जाना है। इस प्रस्ताव पर पिछली एलएसटीसी की बैठक में स्वीकृति मिली थी, जिसके बाद निगम ने टेंडर प्रक्रिया की थी। इसमें 16.89 फीसदी अधिक दर आई थी। राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने निगम अफसरों से कहा है कि चूंकि टेंडर एक बार ही किया गया, इसलिए इतनी अधिक दर पर स्वीकृति नहीं दी जा सकती। टेंडर प्रक्रिया फिर से की जाए।