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दो करोड़ रुपए का हो रहा था नुकसान, शहर के हर घर में पहुंचे तो हुआ खुलासा

घर-घर पहुंचे तो सामने आई चार हजार संपत्ति, निगम के दो विभागों के फेर में हो रहा था नुकसान

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खंडवा

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Amit Jaiswal

Dec 16, 2017

nagar nigam khandwa latest news

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खंडवा. नगर निगम के राजस्व विभाग और जनकार्य तथा उद्यान विभाग के बीच सांमजस्य और जानकारियों के आदान-प्रदान का सांमजस्य नहीं है। इस वजह से हर साल करीब दो करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा था। शहर में नए सिरे से संपत्ति तलाशने के लिए हुए सर्वे में ये खुलासा हुआ है। बता दें कि अक्टूबर के आखिरी से शुरू हुए सर्वे के लिए ३० नवंबर की डेडलाइन थी लेकिन दिसंबर के पहले सप्ताह तक फिल्ड में सर्वे चला। अब कम्प्यूटर पर डेटा फीड किया जा रहा है। बता दें कि इससे पहले जियोग्राफिक इंफोर्मेशन सर्वे (जीआईएस) के फेर में निगम उलझा हुआ था। जुलाई-2011 के में वो सर्वे शुरू हुआ था और जबकि 2017 में भी उसका लाभ नहीं मिला तो निगम के जिम्मेदारों ने सहायक राजस्व निरीक्षक और उनके सहयोगियों से डोर-टू-डोर सर्वे कराया।

सवाल इसलिए उठ रहा
शहर में कोई भी निर्माण नगर निगम की अनुमति से होता है। एेसे में निगम के पास जानकारी तो अपडेट हो ही जाती है। फिर इसकी सूचना राजस्व विभाग को क्यों नहीं मिलती? और अगर मिलती है तो कई मकान टैक्स से क्यों छूटे हुए हैं? जानकारों का कहना है कि इस दिशा में निगम को सही कदम उठाना चाहिए।

फैक्ट फाइल
32 हजार मकान फिलहाल हैं दर्ज
36 हजार संपत्ति दर्ज होने का आंकलन
500 से पांच हजार स्क्वेयर फीट तक का मिला अंतर
50 वार्डों में निगम के राजस्व अमले ने सर्वे पूरा किया
28 सहायक राजस्व निरीक्षक और उनके सहयोगियों ने किया सर्वे
06 करोड़ रुपए संपत्ति कर बनता है अभी
30 फीसदी इजाफा होने की अब है उम्मीद
04 संपत्ति बढऩे का प्राथमिक आंकड़ा आया सामने
80 फीसदी डाटा कम्प्यूटर में कर दिया गया है फीड
1.90 करोड़ रुपए से ज्यादा का बढ़ सकता है राजस्व

इस तरह के मामले आए हैं सामने
- मकान बनने के दो साल तक भी संपत्ति कर नहीं वसूला गया
- मकान में दुकान (व्यसायिक उपयोग) होने के बाद भी घरेलू टैक्स वसूल रहे
- कई घरों में किराएदार रह रहे हैं लेकिन लोग खुद के अवास पर मिलने वाली छूट का लाभ ले रहे हैं

एेसे हुआ सर्वे...
- पूर्व की संपत्ति की विवरणियों की हुई जांच
- सीमांकन कर वास्तविक संपत्ति नए विवरणी पत्रक में भरवाई
- भवनों का संपत्तिकर निर्मित क्षेत्रफल के आधार पर प्राप्त किया गया
- आवासीय और व्यवसायिक तथा गैर आवासीय भवनों की जांच की गई

तीन साल का टैक्स भरवाएंगे
राजस्व व जनकार्य तथा उद्यान विभाग का सामंजस्य रहता है। एेसे मामले ज्यादा सामने आए हैं जहां बगैर परमिशन निर्माण हो गया है। एमआईसी के निर्णय के अनुसार, एेसे लोगों से तीन साल का टैक्स वसूलेंगे।
जेजे जोशी, आयुक्त, ननि