
खंडवा : जल संरक्षण के लिए खोदे गए गड्ढों में सीड बॉल रोपते युवक।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने अनूठी पहल की है। पंचायतों में जल संरक्षित करने 4.50 लाख रिचार्ज पिट खोदे गए। अब बारिश में 2.50 लाख गड्ढों में सीड बॉल रोपे जा रहे हैं। सबकुछ योजना के तहत हुआ तो पंचायतें जल संरक्षण के संग हरी-भरी होंगी ।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायतों को हरा-भरा करने अनूठी पहल की है। पंचायतों में हरित क्रांति के लिए 2.50 लाख गड्ढों ( रिचार्ज पिट ) में सीड बॉल रोपे जा रहे हैं। इन सीड बॉलों में नीम, इमली, पशव, करंज और बबूल जैसे विविध प्रजातियों के बीज बोए गए हैं। जो अंकुरित होकर पौधे बनेंगे।
पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि सीड बॉल में 7 से 21 दिन के भीतर पौधे अंकुरित हो जाएंगे। जिससे कम समय में हरे-भरे पौधे तैयार हो जाएंगे। सबकुछ योजना के तहत हुआ तो प्रत्येक पंचायतों में एक साथ घना और प्राकृतिक जंगल तैयार हो जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 419 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षित करने 4.50 लाख गड्ढे ( रिचार्ज पिट ) खोदे गए हैं। इन्ही गड्ढों में सीड बॉल रोपे जा रहे हैं। इस पहल से न केवल स्थानीय पर्यावरण संतुलित होगा, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने बताया कि जिले में कुल साढ़े चार लाख रिचार्ज पिट बनाए गए हैं। जिनमें से ढाई लाख गड्ढों में सीड बॉल रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौधे तैयार होंगे। संबंधित पंचायतों की जिम्मेदारी होगी कि वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। ताकि वे वृक्षों के रूप में विकसित हो सकें। प्रत्येक पंचायतों में सीड बॉल रोपने का कार्य चल रहा है।
भामगढ़ और खालवा जैसी पंचायतों में अब तक 500 से अधिक सीड बॉल रोपे जा चुके हैं। इसी तरह प्रत्येक ग्राम पंचायतों में गर्मी के समय जल संरक्षण के लिए खोदे गए गड्ढों में सीड बॉल रोपे जाने का कार्य तेजी से चल रहा है। बारिश का मौसम सीड बाॅल के लिए अनुकूल है। इस दौरान कुछ युवा नदियों के आस-पास पौध रोपण का भी कार्य कर रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ कुंवर सिंह कहना है कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण की एक प्रभावी और सरल विधि है। मिट्टी, खाद और बीजों को मिलाकर बनी ये गेंदें बिना अधिक श्रम के बड़े क्षेत्रों में हरियाली फैलाने में सहायक होती हैं। ये वर्षा पर निर्भर करती हैं और अंकुरित होने के बाद स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देती हैं। यह तरीका मिट्टी के कटाव को रोकने और भूजल रिचार्ज में भी योगदान देता है, जिससे सूखे की स्थिति से निपटने में मदद मिलती है।
रिचार्ज पिट में जल संरक्षण के साथ बारिश के दौरान सीड बॉल रोपे जा रहे हैं। बीज अंकुरित के बाद पौधे तैयार होंगे। पंचायतों के बीच भविष्य में घना और प्राकृतिक जंगल तैयार होगा। इससे पर्यावरण संतुलित होगा।
Updated on:
29 Jul 2026 11:58 am
Published on:
29 Jul 2026 11:58 am
