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Biggest tazia – इस शहर में बनते हैं बड़े ताजिए, दूर-दूर से देखने आते हैं लोग

इस शहर में बनते हैं बड़े ताजिए

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sabse bada tajiya kaha banta hai

sabse bada tajiya kaha banta hai

खंडवा.
शहर में मुहर्रम की तैयारी शुरू हो गई है। मुस्लिमों में मुहर्रम की अलग ही महत्व है। मुहर्रम के महीने को पैगम्बर मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की वजह से याद किया जाता है।


इस्लामी नया वर्ष शुरू
इस्लामिक नए वर्ष की मुहर्रम माह से शुरुआत हो गई। मुहर्रम के महीने को हालांकि पैगम्बर मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की वजह से याद किया जाता है लेकिन इस महीने की शहादत के अलावा भी इस्लाम धर्म में खास अहमियत है। मुहर्रम से इस्लामिक नया वर्ष भी शुरू होता है। मुहर्रम महीना शहादत और भाईचारगी का महीना होता है।


इस्लामिक जानकारों का कहना है कि इस्लामिक नए साल की दस तारीख को करबला में मजहब-ए-इस्लाम को बचाने, हक और इंसाफ को ङ्क्षजदा रखने के लिए हजरत इमाम हुसैन 72 साथी के साथ शहीद हो गए थे। मोहर्रम पर पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे (नाती) हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद ताजा होती है। इसलिए इसे मनाया जाता है।

बनने लगे ताजिए

मुहर्रम को लेकर शहर में तैयारियां शुरू हो गई है। इमामवाड़े में ताजिए का निर्माण कार्य चल रहा है। इमामवाड़े में ताजिए का निर्माण में लगे लोग पूरे उत्साह से यह काम कर रहे हैं। यहां बनाए जा रहे ताजियों की आसपात के जिलों तक ख्याति है। यहां बड़े-बड़े ताजिए बनाए जाते हैं। क्षेत्र में सबसे ऊंचे और बड़े ताजिए इमामबाड़ा में ही बनाए जाते हैं। इन बड़े ताजियों को देखने लोगदूर-दूर से यहां आते हैं। यहां ताजियों का निर्माण मोहर्रम की 5वें दिन पूरा हो जाएगा।

मुहर्रम के 11वें दिन निकलेगा चल समारोह
मुहर्रम माह के 7वें दिन और 9वें दिन सवारियां निकाली जाएगी। 10वें और 11वें दिन ताजियों का चल समारोह निकलेगा। जो शहर के प्रमुख मार्गों में भ्रमण करेगा। करीब 45 ताजिए चल समारोह में शामिल होंगे। इसके लिए पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी की जाने लगी हैं। ताजियों का रूट तय किया जा रहा है। पुलिस फोर्स की तैनाती के लिए भी कवायद शुरू हो गई है।