
Sant Tukaram Charit got alive, said this political party in khandwa
खंडवा. ख्यात रंगकर्मी श्रीनिवास कोचकर की स्मृति में रविवार से दो दिनी नाट्य प्रसंग का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन गौरीकुंज में रात ८ बजे से संत तुकाराम महाराज चरित पर नाटक मंचन उज्जैन के दल ने किया। नाटक में संत तुकाराम द्वारा गाए अभंगों की मराठी में प्रस्तुति देकर समाज सुधार व जातपात भूलकर भगवान की भक्ति करने की सीख दी गई। वहीं वर्तमान नेताओं को जातपात छोड़कर राजनीति करने की सीख भी दी।
नाट्य मंचन में कलाकारों ने मंच पर संत तुकाराम महाराज चरित को जीवंत किया। संत तुकाराम पत्नी और पुत्र की मौत के बाद से सांसारिक जीवन छोड़ भगवान पाण्डुरंग की भक्ति में लीन हो जाते हैं। वह शूद्र जाति के होकर भगवान वि_ल मंदिर में भजन-कीर्तन करने के साथ वहीं सेवा किया करते हैं। कीर्तन करते समय उनके मुख से अभंग वाणी निकलने लगी।
नाट्य मंचन देख नाट्यप्रेमी मंत्रमुग्ध हो उठा
यह बात प्रकाण्ड पंडित को पता चलती है तो वह तुकाराम को बुलाकर लिखी रखी अभंग वाणी को नदी में डूबोने की आज्ञा देते हैं। तुकाराम वह अभंग वाणी नदी में डूबो देते है। इससे वह बहुत दुखी होते है और अन्न-जल त्याग कर वि_ल मंदिर में एक शिला पर बैठकर भगवान पाण्डुरंग की भक्ति करने लगते है। तभी भगवान दर्शन देते हैं। इसके बाद से संत तुकाराम महाराज के मुख से अमृत वाग्धारा की वर्षा होने लगती। इसी बीच स्वयं महाराज शिवाजी उनसे मिलने के लिए पहुंचते हैं। नाट्य मंचन देख सभागार में मौजूद हर नाट्यप्रेमी मंत्रमुग्ध हो उठा। नाट्य समारोह मराठी साहित्य अकादमी मप्र संस्कृति परिषद और नट निमाड़ कला समूह के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है। संत तुकाराम चरित नाटक के लेखन और निर्देशन विकास चौहान और परिकल्पना और दिग्दर्शन डॉ. तृप्ति नागर का रहा।
आत्माराम नाटक का मंचन आज
मराठी साहित्य अकादमी के निदेशक अश्विन खरे ने बताया समारोह के दूसरे दिन शरद जोशी द्वारा लिखित नाटक आत्माराम की प्रस्तुति दी जाएगी। नाट्य मंचन भारती इंदौर के कलाकारों करेंगे। कार्यक्रम रात ८ बजे से शुरू होगा।
Published on:
06 Nov 2017 11:52 am
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