
10 potato farmers committed socide Panchayat on Jan 29 at Barabanki10 potato farmers committed socide Panchayat on Jan 29 at Barabanki
खंडवा से पुष्पेन्द्र साहू की रिपोर्ट....
खंडवा के रोशनाई के किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ तरबूज की फसल लगाई और मालामाल हो गया। तरबूज ने स्वाद के साथ जीवन में भी मिठास घोल दी है। किसान का कहना है ये ऐसी खेती है जिसमें कहीं से कहीं तक घाटे का सौदा नहीं है। यदि भाव अच्छे मिल गए तो फिर चांदी ही चांदी है। सबसे बड़ी बात ये मात्र 65 दिन की ही फसल है। एक बार खेत को तैयार कर हम दो बार फसल ले सकते हैं। आइए जानते हैं रोशनाई के किसान ओमप्रकाश पटेल की सफलता का राज, उन्हीं के शब्दों में....
खंडवा से करीब चार किमी दूर ग्राम रोशनाई के किसान ओमप्रकाश पटेल ने बताया कुछ अलग करने की चाह में तरबूज की खेती करने का विचार आया। कृषि वैज्ञानिकों से सलाह-मशवरा किया और पूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद खेत तैयार कर ढाई महीने पहले १३ अगस्त को १० एकड़ जमीन में तरबूज की फसल लगाई। पानी की बचत के लिए ड्रिप पद्धति का सहारा लिया। साथ ही इसी से जरूरी खाद और टॉनिक ड्रिप से ही दिया। मौसम अनुकूल रहने से पौधे ने अच्छी ग्रोथ की और फल खाने में स्वादिष्ट होने के साथ वजन भी बढ़ा।
एक ट्रक माल बेचा, अभी 12 ट्रक और निकलेगा
किसान ओमप्रकाश ने बताया अभी एक ट्रक माल निकला आया है जो करीब 70 हजार रुपए का बिका है। नागपुर के व्यापारी से बात की और वह इसे खेत से ही थोक में साढ़े पांच रुपए किलो ले गए। कुछ ही दिन एक ट्रक माल और निकलेगा। पूरी फसल से करीब 10-12 ट्रक माल निकलने की उम्मीद है। दस एकड़ में कुल साढ़े चार लाख की लागत आई है।
पौधे की ग्रोथ तापमान पर निर्भर
तरबूज के पौधे की ग्रोथ तापमान पर निर्भर करती है। यदि तापमान ४०-४२ डिग्री सेल्सियस के बीच है तो फसल 52-55 दिन में आ जाती है। वहीं 30-32 डिग्री तापमान में 60 दिन में पहली बार फल पूरी तरह तैयार हो जाती है। जितना ज्यादा तापमान ज्यादा रहता है, पौधा उतनी ही तेजी से ग्रोथ करता है। गर्मी के मौसम में तरबूज का पौधा सबसे तेजी से ग्रोथ करता है। साथ ही फल भी बड़ा और स्वादिष्ट होता है लेकिन पानी ज्यादा लगता है। इससे गर्मी में वही किसान लगा सकते हैं जिनके पास पर्याप्त पानी है।
प्रयोग: चॉकलेट ने भगाए कीट-पतंगे
किसान ओमप्रकाश ने खेत में कीट-पतंगे भगाने के लिए एक कंपनी द्वारा बनाई गई चॉकलेट का उपयोग किया। इसे डिब्बे में डालकर खेत में हर 20 फीट की दूरी पर एक डिब्बा छोटी सी लकड़ी पर टांग दिया। इसकी खुशबू से आकर्षित होकर कीट-पतंगे और मच्छर डिब्बे के पास आते हैं और इसकी सुगंध से वह मर जाते हैं। इससे नर-मादा मच्छर फूल पर परागकण नहीं छोड़ पाते और फसल की रक्षा हो जाती है। किसान के इस प्रयोग से फसल में कोई रोग नहीं लगा।
एक बार की लागत में दो फसलें...
किसान के मुताबिक एक पौधे में चार बार फल निकलता है। इसके बाद फल आना बंद हो जाता है। इस तरह अगस्त में लगाई फसल दिसंबर में समाप्ति पर आ जाएगी। लगभग 15 दिसंबर तक इसी खेत में दूसरी बार तरबूज की फसल लगाएंगे। इससे लागत करीब 70 फीसदी कम आएगी। क्योंकि दोबारा पौधे लगाने पर सिर्फ मजदूरी और खाद-बीज का खर्च ही आता। दूसरी फसल भी मार्च तक आ जाएगी।
फैक्ट फाइल...
- १० एकड़ में लगाया तरबूज
- ४.५ लाख रुपए आई कुल लागत
- १२ लाख रुपए मुनाफा
- ६५ दिन में आ जाती है फसल
- ०१ बार लागत लगाकर दो बार ले सकते हैं फसल
- ०१ ट्रक तरबूज नागपुर भेजा
- १२ से अधिक ट्रक अभी और निकलेगी उपज
- ५० हजार रुपए प्रति एकड़ लागत
- १.५ लाख तक प्रति एकड़ मुनाफा
एक एकड़ में खर्च और मुनाफा...
०8 हजार रुपए का बीज
15 हजार रुपए की पॉलीथिन
०9 हजार की ड्रिप
3500 के पाइप
3500 मजदूरी
15 हजार खाद दवाई
35 हजार रुपए कुल लागत
15 टन करीब माल निकलता है
१,५०००० रुपए मुनाफा
Published on:
01 Nov 2017 12:04 pm
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