खंडवा.
निमाड़ी संस्कृति के लोक पर्व गणगौर अपने चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को धनियार राजा और रणुबाई को पानी पिलाने के लिए गांधी भवन ले जाया गया। यहां से माता के ज्वारे गणगौर घाट ले जाकर विसर्जन किए गए। शहर के कई स्थानों पर रथ बौड़ाएं गए। रथ बौड़ाने वाले रविवार को समाज को सामूहिक भोज कराने के बाद ज्वारे विसर्जन करेंगे।
जिले भर में गणगौर पर्व उत्साह, उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शुक्रवार को बाड़ी से ज्वारे लाने के बाद शनिवार को धनियार राजा और रणुबाई को पानी पिलाने के लिए गांधी भवन लाया गया। गांधी भवन में माता को पानी पिलाने के साथ ही धानी, कच्ची कैरी का भोग लगाया गया। यहां से कई लोगों द्वारा गणगौर घाट पर ले जाकर ज्वारे ठंडे किए गए। वहीं शहर में अधिकतर स्थानों पर रथ बौड़ाए (रोके) गए। कहारवाड़ी, गुरवा मोहल्ला, सिंघाड़ तलाई, गणेश तलाई, बड़ा अवार, संजय नगर सहित कई स्थानों पर रविवार को भंडारों का आयोजन किया जाएगा इसके बाद ज्वारे ठंडे किए जाएंगे। यहां भंडारों के दौरान कहार, गुरव समाज द्वारा पत्तल परोसने से लेकर जूठी पत्तल उठाने तक की बोली भी लगाई जाएगी।
माता मायके से जाती है ससुराल
गणगौर की कथा प्रचलित है कि रणुबाई चैत्र में अपने मायके आती है। चैत्र की तीज को धनियार राजा रणुबाई को लेने अपनी ससुराल जाते है। चौथ को माता अपने ससुराल चली जाती है। शनिवार को चैत्र नवरात्र की चौथ पर अनेक स्थानों पर माता को पानी पिलाकर विदाई दी गई। शहर सहित ग्रामीण इलाकों में दशमीं के दिन खड़े लाकर माता की मूठ रखी गई थी, उन स्थानों पर शनिवार को माता ठंडी की गई। जिन स्थानों पर रथ बौड़ाए गए हैं, वहां रविवार को विसर्जन किया जाएगा।
राधारमण सेवा समिति ने जल सेवा की
श्री राधारमण मानव समिति द्वारा गांधी भवन प्रांगण में शनिवार को गणगौर पर्व के चलते जल सेवा की गई। इस अवसर पर समिति के पं. कैलाश चन्द्र डोंगरे, सुनील अग्रवाल, मुकेश सोनी, राजीव चौधरी, दीपक सोलंकी सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।