
बारिश में इस तरह से भर जाता आमोदा के चारों ओर पानी। फाइल चित्र।
मानसून ने अपनी दस्तक दे दी है और दो दिन से अच्छी बारिश भी हो रही है। आगामी दिनों में भी मानसून की बारिश का दौर चलता रहेगा। बारिश के दौरान किए जाने वाले आपदा प्रबंधन की तैयारियां अब तक नहीं हो पाई है। पुनासा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बांगरदा का गांव आमोदा हर बार की तरह बारिश में जिले से कट जाएगा। यहां हर साल 40 से अधिक परिवार बारिश में यह त्रासदी झेलने पर मजबूर है। इंदिरा सागर बांध की डूब में आने के 23 साल बाद भी यहां एक पुल नहीं बन पाया है।
बारिश में जिले के 55 गांव ऐसे है जहां जल भराव या बाढ़ का खतरा बना रहता है। इसमें खंडवा तहसील में आबना नदी के किनारे और मांधाता, हरसूद में नर्मदा किनारे बसे गांव अतिवृष्टि के दौरान प्रभावित होते है। इसके अलावा आशापुर में अग्नि नदी, पंधाना में अर्दला डैम का बैकवाटर एरिया, मूंदी, पुनासा में इंदिरा सागर का बैक वाटर एरिया हमेशा हाई अलर्ट पर रहते है। मांधाता अंतर्गत ग्राम बिल्लौर बुजुर्ग भी नर्मदा की बाढ़ से प्रभावित होता है। इन सब को बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए चिह्नित गांवों में सामान्य श्रेणी में रखा गया है।
इंदिरा सागर बांध की डूब में 252 गांव आए थे, लेकिन आमोदा डूबने से बच गया, किंतु गांव का रास्ता डूब में आ गया। एनएचडीसी ने गांव को डूब में नहीं माना और इस गलती का खामियाजा पिछले 23 साल से आमोदा के लोग झेल रहे है। बरसात शुरू होते ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ जाती है। जलस्तर बढऩे के साथ गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग कट जाता है। ऐसे में बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो, बच्चों को स्कूल भेजना हो या फिर दैनिक उपयोग की सामग्री लानी हो, हर कार्य किसी चुनौती से कम नहीं रहता। कई बार ग्रामीणों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता है, जबकि कुछ लोग जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से निकलने को मजबूर हो जाते हैं।
मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है, लेकिन बाढ़ आपदा प्रबंधन की तैयारियां अधूरी है। जिले में बाढ़ आपदा प्रबंधन का कंट्रोल रूम बनाया गया है। चार डिजास्टर रिकवरी सेंटर (डीआरसी) आशापुर, पंधाना, मूंदी और ओंकारेश्वर में बनाए गए है। होमगार्ड द्वारा आपदा मित्रों को अभी प्रशिक्षण ही दिया जा रहा है। एनएचडीसी द्वारा अभी तक आमोदा में नाव की व्यवस्था भी नहीं की गई है। यहां बांध का जल स्तर 250 मीटर से अधिक होने पर रास्ते के आसपास पानी आना शुरू हो जाता है। 262 के लेवल पर तो गांव टापू बन जाता है।
बारिश में आमोदा के टापू बनने की जानकारी प्रशासन को कई बार दी जा चुकी है। दो दशक से प्रशासन सिर्फ व्यवस्था करने का काम ही कर रहा है, स्थाई हल नहीं निकाल पाया है। चार महीने आमोदा के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
राजू पटेल, सरपंच प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत बांगरदा
पुल बनने से होगी समस्या हल
हमारी समस्या कोई नई नहीं है, सांसद, विधायक, कलेक्टर, सीएम हेल्प लाइन में भी शिकायत दर्ज है। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पिछले 23 साल से परेशान है। हमारी समस्या का एक ही हल है कि यहां पुल बन जाए।
शिवराम यादव, ग्रामीण
बाढ़ आपदा प्रबंधन को लेकर हमारी तैयारी चौकस है। सारी व्यवस्था की जा चुकी है। इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर पर लाइफ जैकेट, लाइफ बाय, रोप, टार्च आदि उपलब्ध करा दी है। क्यूआरटी भी तैयार है। आमोदा में नाव की व्यवस्था एनएचडीसी द्वारा की जाती है।
आशीष सिंह कुशवाह, डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड
Updated on:
26 Jun 2026 12:23 pm
Published on:
26 Jun 2026 12:23 pm
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