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कई किमी का फेर बचाएगा 3.5 किमी लंबा और 30 फीट चौड़ा बायपास

30 साल से था इंतजार: खंडवा-बड़ौदा व भुसावल-चित्तौडगढ़ हाइवे को लिंक करते हुए बनाया जाएगा बायपास

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30 साल से था इंतजार

खरगोन. तीस साल के लंबे इंतजार के बाद अब शहर को मिलने वाले बायपास की धुुंधली तस्वीर साफ होने लगी है। जल्दी ही इसे अमली जामा पहनाया जाएगा। सनावद रोड को खंडवा रोड से, खंडवा रोड को बिस्टान रोड से तथा बिस्टान रोड को उमरखली रोड से जोड़ने के लिए बायपास प्रस्तावित है। हाल ही में अफसरों ने इसकी भौगोलिक स्थिति देखी और इशारा किया है कि जल्दी ही निर्माण शुरू होगा। बायपास बनने से वर्षो से अव्यवस्थित यातायात का दंश झेल रहे शहर को भारी दबाव से मुक्ति मिलेगी। हादसों पर ब्रेक लगेगा और आवागमन सुगम होगा। यह बायपास कई किमी का फेर भी बचाएगा.

दिसंबर के पहले सप्ताह कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने संबंधित अफसरों के साथ शहर के उन स्थानों का जायजा लिया जहां से बायपास निकलना है। निरीक्षण के बाद 3.5 किमी लंबे और 30 फिट चौड़े बायपास के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

बायपास से जुड़ेंगे यह मार्ग
शहर में तैयार बायपास से कसरावद मार्ग को सनावद मार्ग से, सनावद मार्ग को खंडवा मार्ग से, खंडवा मार्ग को बिस्टान मार्ग से और बिस्टान मार्ग को जुलवानिया मार्ग से जोड़ा जाएगा। अभी इन तमाम रास्तों पर जाने के लिए वाहन दो लाख आबादी वाले शहर के बीच बने डायवर्शन रोड से होकर ही गुजरते हैं। इससे सड़क खराब तो हो रही है, दुर्घटनाएं भी ज्यादा हो रही है। बायपास बनने के बाद यह समस्याएं खत्म हो जाएगी। भारी वाहन शहर से बाहर ही गुजर जाएंगे।

घटेगी दूरी, शहर में भी भीड़ कम
बायपास बनने के बाद शहरी क्षेत्र में सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा। अभी छोटे-बड़े सभी वाहन कुंदा नदी पुल के सहारे डायवर्शन रोड से होते हुए बीच शहर से गुजरते हैं। शहर का स्थानीय यातायात भी इसी रास्ते का उपयोग करता है। ऐसे में पूरा दिन वाहनों का रैला इस मार्ग पर रहता है। सबसे खास बात यह है कि बासपास बनने के बाद कई गांवों—शहरों की दूरी भी कम तय करनी पड़ेगी। कसरावद, सनावद, खंडवा आदि के लिए दूरी और समय कम लगेगा.

बायपास की कमी से हो रही ये परेशानियां
- दुर्घटनाओं में जान गंवा चुके हैं कई लोग
- वाहनों का दबाव डायवर्शन रोड व नदी पुल पर बढ़ता है
- भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें समय से पहले जर्जर हो रही हैं
- वाहनों की आवाजाही से प्रदूषण बढ़ रहा है
- परिवहन में भी लग रहा अधिक समय