
सीवरेज जैसी बदबू मारता किशनगढ़ का यह तालाब
मदनगंज-किशनगढ़. किशनगढ़ का ऐतिहासिक हमीर सागर तालाब अनदेखी के चलते अब सीवरेज तालाब में तब्दील हो गया है। तालाब में नालों के साथ गंदगी और कचरा पहुंचने से पानी प्रदूषित हो गया है। इसके पेटे में अतिक्रमण की चलते भराव क्षमता को आधा कर दिया है। इसके बावजूद इसकी सुध नहीं ली जा रही है।
किशनगढ़ का हमीर सागर तालाब यहां के लोगों की प्यास बुझाने के काम आता था। इसके पास ही ऐतिहासिक पशु मेला लगता था। घर-घर पानी पहुंचने और समय के साथ इसे बिसरा देने के कारण यह ऐतिहासिक तालाब अब सीवरेज तालाब बनकर रह गया है। स्थिति यह तालाब में गांधीनगर, चमड़ा घर सहित आस-पास के क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा पानी और गंदगी सीधे तालाब में जा रही है। इससे जलीय जीव-जंतुओं के जीवन पर भी संकट गहराता जा रहा है। पानी में प्रदूषण इतना अधिक है कि इसका पानी किसी भी काम में नहीं लिया जा सकता है। यह जानकारी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन को होने के बावजूद इसकी सुध नहीं ली जा रही है। इससे इसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बदत्तर होती जा रही है। यदि इस ओर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो यह तालाबभी सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगा।
भराव क्षेत्र चढ़ा अतिक्रमण की भेंट
जानकारों की मानें तो हमीर सागर तालाब का फैलाव करीब 60 बीघा में था। इसके पेटे में अतिक्रमण के चलते आधे भाग पर अतिक्रमण हो गया है। अतिक्रमण के चलते यह दिनों-दिन सिमटता जा रहा है। यहां पर ईंट, पट्टी और बजरी आदि के गोदाम बन गए है।
गुंंदोलाव झील में पहुंचती है गंदगी
हमीर सागर तालाब में नालों के गंदे पानी की चौबीस घंटे आवक होने के कारण यह हमेशा भरा ही रहता है। इसके कारण बारिश आते ही इसकी चादर चलने लग जाती है। इसका पानी और गंदगी नालों के माध्यम से गुंदोलाव झील में पहुंचती है। इसके कारण झील का पानी भी दूषित हो जाता है।हालांकि गुंदोलाव झील में कई नालों का पानी और गंदगी पहुंच रही है। इससे इसका पानी भी किसी काम का नहीं रह गया है।
यह होना चाहिए
- हमीर सागर में गिरने वाले नालों को रोका जाए।
- तालाब के पेटे से अतिक्रमण को हटाना चाहिए।
- ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को साफ किया जाए।
- इसकी चारदीवारी बनाकर सुरक्षित किया जाए।
- पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
प्यास बुझाने में मिल सकती है मदद
हमीर सागर तालाब का सही तरीके रख-रखाव कर उसको संरक्षित कर दिया जाए तो यह किशनगढ़ के लोगों की प्यास बुझाने में मदद कर सकता है। इसका फैलाव कभी 60 बीघा में होता था। इसकी चारदीवारी कर इसमें गिरने वाले पानी को रोका जाए। इसकी खुदाई करवाकर इसके पानी को ट्रीट कर पानी का उपयोग किया जा सकता है।
Published on:
03 Jun 2019 11:05 am
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