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श्री श्याम मंदिर आलमबाजार :धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां है पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा

गंगा के निकट और दक्षिणेश्वर क्षेत्र से कुछ दूरी पर श्याम बाबा को समर्पित इस मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण, हनुमान जी और शिव परिवार के देवालय भी हैं।
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कोलकाता

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MUKESH VYAS

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Updated: 3 Sep 2026, 10:53 PM IST

alambazar

मंदिर में मौजूद श्रद्धालु

आलमबाजार में स्थित श्री श्याम मंदिर में होने वाले विभिन्न धार्मिक आयोजन और सेवा गतिविधियां इसे विशेष बनाती हैं। गंगा के निकट और दक्षिणेश्वर क्षेत्र से कुछ दूरी पर श्याम बाबा को समर्पित इस मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण, हनुमान जी और शिव परिवार के देवालय भी हैं। मंदिर निर्माण का संकल्प सीकर जिले के गाड़ोदा गांव से जुड़े गोविंद मुरारी अग्रवाल के मन में आया। मंदिर के लिए प्रस्तावित भूमि से जुड़े विवाद और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण इस योजना को पूरा करने में समय लगा।

वर्ष 2008 में भूमि संस्था की देखरेख में आई

संस्था के अध्यक्ष दिवंगत भैरव दत्त खेतान और अन्य सहयोगियों के प्रयासों से वर्ष 2008 में भूमि संस्था की देखरेख में आई। भूमि संबंधी प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए लगभग 75 प्रतिशत भूमि का स्वामित्व संस्था को प्राप्त हुआ। 16 मई 2010 को भूमि पूजन किया गया। 2013 में अक्षय तृतीया के अवसर पर मंदिर के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई। राजस्थान से आए कारीगरों ने मकराना पत्थरों पर पारंपरिक नक्काशी का काम किया और मंदिर को राजस्थानी स्थापत्य शैली में आकार दिया। भव्य स्थापत्य और राजस्थानी शिल्प मंदिर की वास्तुकला इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है। मुख्य गर्भगृह को चांदी की आकर्षक नक्काशी से सजाया गया है। मंदिर के निर्माण और विकास में गणेश अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंदिर निर्माण के बाद 30 जनवरी से 2 फरवरी 2020 तक धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा श्याम के विग्रह की प्रतिष्ठा संपन्न हुई। प्रथम तल पर बने गर्भगृह में बाबा श्याम का विग्रह स्थापित किया गया। इस अवसर पर देश के विभ्भिन्न राज्यों से आए कई प्रतिष्ठित और विद्वानों एक आगमन हुआ और उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

सालभर होते है धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

सालभर आयोजित किए जाने वाले विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में श्रीमद्भागवत कथा, जन्माष्टमी, श्री श्याम जन्मोत्सव, फाल्गुन मेला और एकादशी महोत्सव प्रमुख हैं। फाल्गुन मेले के अवसर पर फूलों की होली का विशेष आयोजन किया जाता है। प्रत्येक शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी की शाम श्याम कीर्तन एवं भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। द्वादशी के अवसर पर बाबा श्याम की ज्योत जलाई जाती है तथा पूरे दिन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। इसे कोलकाता का भव्य खाटू श्याम धाम कहा जाता है जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है।

सामाजिक गतिविधियां पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा

मंदिर की भोजन सेवा और सामाजिक गतिविधियां भी इसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मंदिर द्वारा लंबे समय से जरूरतमंद लोगों के लिए दोपहर और शाम भोजन सेवा संचालित की जा रही है। इसके अतिरिक्त रक्तदान शिविर, निशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच, चश्मा वितरण और जरूरतमंद मरीजों के निशुल्क नेत्र ऑपरेशन जैसी स्वास्थ्य सेवाएं भी आयोजित की जाती हैं।

अन्य गतिविधियां भी शामिल

अन्य गतिविधियों में कंबल वितरण आदि शामिल हैं। दुर्गा पूजा के दौरान भी मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और भंडारे की व्यवस्था की जाती है। मंदिर की सेवा गतिविधियों के साथ-साथ इसके प्रचार-प्रसार में दिवंगत राजा अग्रवाल की विशेष भूमिका रही। धार्मिक आयोजनों और सेवा कार्यों को लोगों तक पहुंचाने तथा मंदिर की गतिविधियों के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को मंदिर से जुड़े लोग आज भी स्मरण करते हैं।

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