
मनरेगा से अब तक 18 सौ से अधिक तालाब का गहरीकरण का भी दावा
कोरबा. पिछले 10 साल में कोरबा जिले में 21 सौ तालाब का निर्माण कराया गया है। 417 तालाब तो सिर्फ करतला ब्लॉक में खोदे गए। उसके बाद भी ग्रामीण पानी के लिए भटकने को मजबूर है।
आधे से ज्यादा सूखे पड़े हैं। रामपुर विधायक ने इस मामले में सवाल उठाते हुए कहा है कि कहां-कहां तालाब बने सभी की जांच करवाई जाएगी। अगर इतनी अधिक संख्या में तालाब बने हैं तो हैं कहां? इसकी जांच जरूरी है।
मनरेगा द्वारा 2007-08 से लेकर 2017-18 तक कोरबा जिले के पंाचों विकासखंड में 2188 तालाब का निर्माण कराया गया। हर जिले में औसत सवा चार सौ तालाब खोदे गए। लेकिन इतने तालाब हैं कहां यह बड़ा सवाल है। क्योंकि कोरबा मेें हर साल गर्मी में पेयजल के लिए किल्लत होती है।
पीने के लिए दूर की बात निस्तारी के लिए भी लोगों को परेशान होना पड़ता है। रामपुर विधायक श्यामलाल कंवर के विधानसभा में लगाएं गए सवाल में विभाग ने जवाब दिया है कि 2007 से लेकर अब तक करतला तहसील में 417 तालाब नए बनाएं गए। जबकि 400 से ज्यादा तालाबों का गहरीकरण भी किया गया है। विधायक ने भी इस मामले में आश्चर्य जताते हुए कहा है कि अगर विभाग के आंकड़ों में विश्वास किया जाएं तो उनके क्षेत्र में लगभग 1 हजार तालाब है।
अगर एक हजार तालाब होते तो पानी की कहीं से किल्लत ही नहीं होती। विधायक ने मनरेगा से तालाबों की सूची की मांग की है। जिसके बाद सत्यापन कराया जाएगा।
48 हजार खेतों का समतलीकरण करने का भी दावा
तालाब के बाद मनरेगा द्वारा 10 साल में 48 हजार खेत का भी समतलीकरण करने का दावा किया जा रहा है। अकेले करतला में ही साढ़े नौ हजार खेत का समतलीकरण किया गया है। हर साल तीन सौ से पांच सौ ख्ेात का समतलीकरण किया जा रहा है। जबकि खेत हर साल समतल होते हैं। सिर्फ ऐसे खेत जिनमें ख्ेाती पहली बार होनी होती है। जिसमें टिले होते हैं। उसे ही समतल किया जाता है। सवाल उठता है कि ऐसे खेत हर साल इतनी अधिक संख्या में समतल कैसे हो रहे हैं।
-रामपुर विधानसभा क्षेत्र मेें 10 साल में मनरेगा द्वारा इतने अधिक संख्या में तालाब बनाने का दावा किया जा रहा है, अगर इतने तालाब वाकई में होते तो ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। विभाग से एक-एक शौचालय की जानकारी मांगी जाएगी। जिसका सत्यापन कराया जाएगा।
-श्याम लाल कंवर, विधायक, रामपुर विधानसभा
-कई जगह से शिकायत आती है जिसपर जांच कर कार्रवाई की गई है। तालाबों में अमूमन चार से पांच साल में लाद आ जाती है। जिससे उसकी गहराई कम हो जाती है। तालाब खोदे जरूर गए हैं हो सकता है उसमें पानी कम हो।
-संदीप डिक्सेना, एपीओ, मनरेगा।
Published on:
09 Jul 2018 12:54 pm
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