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जिले में हर दिन जन्म लेते हैं 65 नवजात, जानिए कैसै हैं प्रसव के हालात

जिले के जनसंख्या में डेढ़ लाख की वृद्धि
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कोरबा

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Shiv Singh

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Updated: 11 Jul 2018, 11:42 AM IST

जिले के जनसंख्या में डेढ़ लाख की वृद्धि

जिले के जनसंख्या में डेढ़ लाख की वृद्धि

कोरबा. कोरबा जिले में प्रतिदिन औसतन 65 बच्चे जन्म ले रहे हैं। पहले के मुकाबले प्रसव दर कम हई है। जिले के औसत 13 लोगों की मृत्यु हो रही है। 2011 की जनगणना के बाद पिछले सात साल में जिले के जनसंख्या में डेढ़ लाख की वृद्धि हुई है। शहर की तुलना में गांव की जनसंख्या में 60 फीसदी का इजाफा हुआ है।


11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस है। विश्व आबादी से जुड़े मुददें और जागरूकता को लेकर यह दिवस मनाया जाता है। बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है। उसके बाद भी जनसंख्या में वृद्धि लगातार हो रही है।

इस दिवस पर हर नागरिक को जनसंख्या नियंत्रण में अपना योगदान देने की बात कही जाती है। लेकिन कोरबा जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। 2011 में जनगणना के मुताबिक जिले की जनसंख्या 12लाख 66 हजार 40 थी।

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जिले के स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य सूचकांक के मुताबिक दिसंबर 2017 तक जिले की जनसंख्या लगभग 13 लाख 52 हजार 889 हो चुकी है। इस आंकड़े पर गौर करें तो कोरबा जिले में इस सात साल में एक लाख 46 हजार से अधिक जनसंख्या में वृद्धि हुई है। 2011 में ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या 8 लाख 43 हजार के आसपास थी। जोअब बढ़ कर 9 लाख 45 हजार के पास पहुंच चुकी है।

जबकि शहरी क्षेत्र में जनसंख्या 2011 में 3 लाख 63 हजार थी। जो अब 4 लाख हो चुकी है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। जनसंख्या वृद्धि की यह स्थिति तब है जब केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण क लिए प्रयास किये जा रहे और जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है।


प्रतिवर्ष 25 हजार से अधिक का जन्म
जानकर हैरत होगी कि कोरबा जिले में हर साल औसत 25 हजार से अधिक बच्चों का जन्म हो रहा है। 2012 से लेकर दिसंबर 2017 तक जिला सांख्यिकी विभाग द्वारा हर महीने ग्रामीण क्षेत्रों के हेल्थ सेंटर, निजी नर्सिंग होम, जिला अस्पताल समेत ऐसे सभी जगहों से डाटा कलेक्ट किया जाता है। विभाग द्वारा जारी प्रपत्र के माध्यम से ही प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। इसकी पूरी जानकारी महीने के अंत में विभाग को दी जाती है। पिछले साढ़े छह साल में ऐसा कोई साल नहीं बीता जब 25 हजार से अधिक शिशुओं का जन्म प्रमाण पत्र न बने हों।


...अधिक मौतें
आंकड़ों को देखा जाएं तो 2012 से लेकर अब तक हर साल पांच हजार औसतन लोगों की मृत्यु हो रही है। एक दो वर्षों में स्थिति ऐसी भी बनी जब मौत का आंकड़ा 8 हजार के भी करीब पहुंच गया है। 55 वर्ष उम्र से अधिक लोगों की स्वभाविक मौत हो रही है।


-पहले के आंकड़ों में कमी जरूर आई है। पहले एक साल में 40 हजार तक बच्चों का जन्म होता था। लोगों में जागरूकता आ रही है। धीरे-धीरे इसमेें कमी आते जाएगी। इसके लिए हर लोग को समझना होगा।
-पीएस सिसोदिया, सीएमएचओ, कोरबा