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बड़ी खबर : कोयलांचल के विद्युत संयंत्रों में कोयला संकट, ऐसे ही चलता रहा तो पूरे राज्य में बिजली संकट के आसार

एनटीपीसी में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा

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कोरबा

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Shiv Singh

Jun 30, 2018

एनटीपीसी में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा

एनटीपीसी में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा

कोरबा. प्रदेश के थर्मल पॉवर प्लांट कोयले के संकंट से जूझ रहे हैं। आपूर्ति इतनी खराब है कि 2600 मेगावाट की एनटीपीसी में सिर्फ एक दिन का कोयला बचा है।

कोरबा पूर्व के संयंत्र में भी कोयले की कमी है। बालको के बिजली संयंत्र को भी कोयले की आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही है। इन संयंत्रों को जरूरत के अनुसार कोयला नहीं मिला तो बिजली उत्पादन बाधित होना तय है।


तापमान में गिरावट के बावजूद प्रदेश में बिजली की मांग 3039 मेगावाट के आसपास बनी हुई है। प्रदेश में बिजली की मांग को कोरबा में स्थापित केन्द्र और राज्य सरकार के पॉवर प्लांट करते हैं। लेकिन सेंट्रल इलेक्ट्रिीसिटी ऑथोरिटी की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश के बिजली संयंत्रों की हालत ठीक नहीं है।

संयंत्रों में कोयले की जबरदस्त कमी है। कोरबा के एचटीपीएस में एक दिन के लिए कोयला शेष है। इस संयंत्र को प्रतिदिन तीन हजार 800 टन कोयले की जरूरत है। प्लांट में लगभग दो हजार टन कोयला बचा है। इससे यूनिट को अधिकतम एक दिन ही चलाया जा सकता है।

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कोरबा पूर्व स्थित 440 मेगावाट के संयंत्र की हालत भी कोयले के मामले में ठीक नहीं है। इस प्लांट में चार दिन तक बिजली उत्पादन के लिए कोयले का स्टॉक है। बालको के थर्मल पॉवर प्लांट में भी कोयले की कमी है। स्टॉक में चार दिन का कोयला है। जांजगीर चांपा जिले के मड़वा स्थित बिजली कारखाना में भी पर्याप्त कोयला नहीं है।


एसईसीएल पर निर्भर है कोयले की आपूर्ति
प्रदेश के अधिकांश बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति एसईसीएल के खदानों से होती है। एनटीपीसी की जमनीपाली यूनिट को गेवरा खदान से कोयला दिया जाता है। छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी की सभी इकाइयों को कोरबा, दीपका, कुसमुंडा और गेवरा एरिया से कोयला मिलता है।


-संयंत्र में एक दिन का ही स्टॉक है। लेकिन सप्लाई नियमित आ रही है। इससे फिलहाल उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। लेकिन कोयले की सप्लाई अनियमित होने पर परेशानी बढ़ सकती है।
-आशुतोष नायक, जनसंपर्क अधिकारी, एनटीपीसी कोरबा